नोएडा-ग्रेटर नोएडा में हाईराइज भवनों की आग से सुरक्षा, आरडब्ल्यूए ने उठाए गंभीर सवाल, सीएफओ को सौंपा ज्ञापन

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र में हालिया आग की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ गई है। डी डी आरडब्ल्यूए (डिस्टिक्ट डेवलपर्स रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) के अध्यक्ष श्री एन पी सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज जिला मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) श्री प्रदीप कुमार चौबे से महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में हाईराइज सोसाइटियों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य स्थानों पर आग बुझाने के अपर्याप्त उपकरणों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। आरडब्ल्यूए ने सीएफओ को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और रोकथाम के उपायों की मांग की गई।

बैठक में एन पी सिंह ने बताया कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में लाखों लोग रहते हैं, जहां 40-50 मंजिला हाईराइज सोसाइटियां, सेक्टर, कम्युनिटी सेंटर, वेडिंग होम्स, फार्म हाउस और औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अग्निशमन विभाग के पास इन ऊंची इमारतों के अनुरूप हाइड्रोलिक लिफ्ट या अन्य विशेष उपकरण नहीं हैं, जिससे आग लगने पर जानमाल का खतरा बढ़ जाता है। “बिल्डरों को बिल्डिंग प्लान स्वीकृत करने से पहले फायर सेफ्टी उपकरण अनिवार्य होने चाहिए। ऊंचाई के हिसाब से उपकरण न होने पर अनुमति न दी जाए,” उन्होंने जोर देकर कहा। साथ ही, गांवों में बने अपार्टमेंट्स तक फायर वाहन न पहुंच पाने की समस्या का भी जिक्र किया, जहां संकरे रास्तों के अभाव में राहत कार्य असंभव हो जाता है।

आरडब्ल्यूए ने मांग की कि सभी हाईराइज सोसाइटियों, वेडिंग होम्स, फार्म हाउस, कम्युनिटी सेंटर्स और औद्योगिक इकाइयों में फायर एक्सटिंग्विशर सहित पूर्ण फायर सेफ्टी किट लगाए जाएं। इसके अलावा, हाईराइज निर्माण के कारण भूजल स्तर गिरने से पानी की भयानक कमी हो गई है, इसलिए 10-12 मंजिल से ऊपर की बिल्डिंग्स को मंजूरी न दी जाए। प्रतिनिधिमंडल ने सीएफओ से अनुरोध किया कि सभी सेक्टर्स और सोसाइटियों में फायर सर्विस ऑफिसरों की बैठकें आयोजित कर जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के स्थानीय विधायक ने कहा, “प्रशासन की लापरवाही से हाईराइज निवासियों की जान खतरे में है। हम सदन में इसकी चर्चा करेंगे और उपकरण खरीदने के लिए बजट की मांग उठाएंगे।” समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने इसे “बिल्डर माफिया की साजिश” करार देते हुए आरोप लगाया कि प्राधिकरण रिश्वत लेकर सुरक्षा नियम तोड़ रहे हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाते हुए कहा, “नोएडा के निवासी सड़कों पर उतरेंगे अगर फायर टेंडर और हाइड्रोलिक लिफ्ट न आए।” कांग्रेस ने भी प्राधिकरण पर भ्रष्टाचार का ठीकरा फोड़ा।

आम जनता की चिंता और जागरूकता की मांग

आम निवासियों ने भी आवाज बुलंद की। सेक्टर-62 की एक हाईराइज सोसाइटि की महिला निवासी ममता तिवारी ने कहा, “रात को आग लगने पर क्या होगा? हमारे बच्चे सुरक्षित कैसे रहेंगे?” ग्रेटर नोएडा के एक फार्म हाउस मालिक राजू प्रधान ने बताया, “शादी समारोह में भीड़ होती है, लेकिन फायर उपकरण नाममात्र के हैं।” सोशल मीडिया पर #NoidaFireSafety ट्रेंड कर रहा है, जहां हजारों लोग अपनी कहानियां साझा कर रहे हैं। एक सर्वे में 80% निवासियों ने बताया कि उनकी सोसाइटी में फायर ड्रिल कभी नहीं हुई।

सीएफओ का आश्वासन, सहयोग का वादा

सीएफओ प्रदीप कुमार चौबे ने बैठक में संतोष जताया और कहा, “आरडब्ल्यूए का यह कदम सराहनीय है। हम पूर्ण सहयोग करेंगे। सभी सेक्टर्स और अपार्टमेंट्स में जल्द मीटिंगें आयोजित कर जागरूकता अभियान चलाएंगे।” उन्होंने बताया कि विभाग के पास 20 फायर टेंडर हैं, लेकिन हाईराइज के लिए दो अतिरिक्त हाइड्रोलिक लिफ्ट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फायर सर्विस ऑफिसर विनोद पांडे भी मौजूद रहे। बैठक में डी डी आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, महासचिव शेर सिंह भाटी, ममता तिवारी, राजू प्रधान सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सुझाव लागू हुए तो नोएडा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में आग की घटनाओं में 50% कमी आ सकती है। प्राधिकरण ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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