ममता का बीजेपी पर ‘एक दल का राज’ का आरोप, CEC ज्ञानेश कुमार को बताया ‘खलनायक’; BJP की प्रचंड जीत के बाद असनसोल का बंद दुर्गा मंदिर खुला

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 साल बाद एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत को पार कर लिया और इसी प्रचंड जीत की पृष्ठभूमि में असनसोल में वर्षों से बंद पड़ा एक दुर्गा मंदिर मंगलवार को श्रद्धालुओं के लिए पुनः खुल गया। इस घटना ने राज्य की राजनीति में नए प्रतीकों की शुरुआत कर दी है।

बंद मंदिर का खुलना — धार्मिक राहत या राजनीतिक संदेश?
असनसोल में श्री श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित यह मंदिर कई वर्षों से स्थानीय तनाव और प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण बंद था। आम दिनों में इसके कपाट बंद रहते थे और केवल दुर्गा पूजा व लक्ष्मी पूजा जैसे बड़े त्योहारों पर ही इसे खोला जाता था। मंदिर का पुनः खुलना पश्चिम बर्धमान जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर BJP की जीत के ठीक बाद हुआ।  BJP नेता और मंदिर समिति के सदस्य नीलू चक्रवर्ती ने कहा, “इतने दिनों बाद मंदिर खुला है और असनसोल के सभी हिंदू खुश हैं। लंबे समय से हम दिल्ली के नेताओं को बैठकों में बताते थे कि यहाँ एक हिंदू मंदिर है, लेकिन दुर्गा पूजा और काली पूजा के अलावा कोई पूजा नहीं होने देता था।”

असनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित BJP विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि जीतने पर मंदिर साल भर खुला रहेगा, मंगलवार को मंदिर का दौरा किया और उसके औपचारिक पुनः उद्घाटन की अगुवाई की। असनसोल दक्षिण से BJP नेता अग्निमित्रा पॉल ने भी 40,839 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। स्थानीय लोगों ने मंदिर खुलने पर जोश और उत्साह के साथ प्रतिक्रिया दी। BJP नेताओं और स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं ने मंदिर के पुनः खुलने को “जनादेश का प्रतिबिंब” बताया। हालांकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहे हैं।

बंगाल में BJP का ऐतिहासिक सफर — 77 से 206 तक
2021 के विधानसभा चुनाव में BJP को केवल 77 सीटें मिली थीं, जबकि TMC ने 212 सीटें जीती थीं। इस बार BJP ने 206 सीटें जीतकर TMC को 80 सीटों पर समेट दिया। BJP को 45.84% वोट मिले जबकि TMC को 40.80% वोट मिले — यह आँकड़ा बताता है कि जमीनी स्तर पर मुकाबला कड़ा था, लेकिन सीटों में भारी अंतर आया। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए मतदान में 92.47 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया जो आज़ादी के बाद का सर्वाधिक है। फाल्टा सीट पर “गंभीर चुनावी उल्लंघन” के कारण 21 मई को पुनर्मतदान होगा और परिणाम 24 मई को आएगा।

सबसे बड़ा उलटफेर — ममता का भवानीपुर में हार
इस चुनाव का सबसे नाटकीय मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी परंपरागत सीट भवानीपुर में BJP के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गईं। सुवेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे विश्वासपात्र सहयोगियों में से एक थे और 2011 में उन्हें सत्ता में लाने के प्रमुख सूत्रधारों में से एक थे। 2020 में दोनों के बीच दरार उजागर हुई और अधिकारी BJP में शामिल हो गए। 

ममता की प्रतिक्रिया — “इस्तीफे का सवाल नहीं, मैंने चुनाव नहीं हारा”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परिणामों को “अनैतिक” करार देते हुए बीजेपी पर 100 से अधिक सीटें “लूटने” का आरोप लगाया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को “खलनायक” बताकर चुनाव आयोग पर पक्षपात का ठप्पा लगाया। ममता बनर्जी ने आगे कहा, “बीजेपी ‘एक राष्ट्र, एक नेता, एक दल’ का नशा पी रही है। वे संवैधानिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए हथियार बना रहे हैं।” उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर सीईसी पर चिल्लाने और उत्पीड़न के आरोप दोहराए, जो चुनाव पूर्व से विवाद का विषय बना हुआ था।

हार के बाद ममता बनर्जी ने तेवर नहीं छोड़े। उन्होंने BJP पर धार्मिक ध्रुवीकरण और 15 साल की सत्ता-विरोधी भावना का फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे तब तक मतगणना केंद्र न छोड़ें जब तक अंतिम वोट की गिनती न हो जाए। उन्होंने BJP पर उन्हें मतदान केंद्रों तक जाने से रोकने का आरोप भी लगाया। रिपोर्ट के अनुसार ममता ने स्पष्ट कहा — “इस्तीफे का कोई सवाल नहीं, मैंने चुनाव नहीं हारा” — यह बयान उन्होंने पार्टी की भारी हार के बावजूद दिया। हार स्वीकार करने के बाद वे अपने आवास लौट गईं।

BJP में मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन — दिल्ली में बैठकों का दौर
प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार और बुधवार को नई दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह और BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के प्रमुख पदों को अंतिम रूप देने के लिए बैठक करेंगे। बंगाल BJP अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और सुवेंदु अधिकारी को आने वाले दिनों में नई दिल्ली में रहने को कहा गया है। मंत्रिमंडल में जिन नामों पर चर्चा है उनमें स्वपन दासगुप्ता, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रामाणिक, रितेश तिवारी, रूपा गांगुली और रुद्रनील घोष शामिल हैं। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल में SC, ST और OBC समुदायों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने की “ऐतिहासिक पूर्ति” बताया।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक इस जीत को केवल चुनावी नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव का संकेत मान रहे हैं। असनसोल के दुर्गा मंदिर का खुलना इसी परिवर्तन का प्रतीकात्मक उदाहरण बनकर उभरा है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि पश्चिम बंगाल में वह दल सत्ता में आ रहा है जो केंद्र में भी काबिज है — यह राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है। वहीं दूसरी ओर TMC के नेता BJP पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और केंद्रीय बलों के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए लड़ाई जारी रखने की बात कर रहे हैं।

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