होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच फिर भड़की जंग, दक्षिण कोरियाई जहाज़ पर हमला, UAE पर मिसाइलें

ट्रम्प की चेतावनी “ईरान को उम्मीद करनी चाहिए कि युद्धविराम बना रहे”; अमेरिकी नौसेना ने 6 ईरानी नावें डुबोईं, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने पहले हुआ युद्धविराम अब बेहद नाज़ुक हालत में है। सोमवार 4 मई को ईरान ने एक दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज़ पर हमला किया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर मिसाइलें और ड्रोन दागे, और अमेरिकी नौसेना के जहाज़ों को निशाना बनाने की कोशिश की। जवाब में अमेरिकी सेना ने छह ईरानी छोटी नावें नष्ट कर दीं।

पृष्ठभूमि: कैसे यहाँ तक पहुँचे हालात?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 28 फरवरी 2026 को ईरान के खिलाफ “बड़े सैन्य अभियान” की घोषणा की थी, जिसमें अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान के सैन्य, सरकारी और बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया था। युद्धविराम 8 अप्रैल 2026 को लागू हुआ, और ट्रम्प ने 21 अप्रैल को इसे अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया ताकि कूटनीतिक बातचीत जारी रह सके। ईरान ने 17 अप्रैल को युद्धविराम के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाज़ों के लिए खुला घोषित किया था। लेकिन अमेरिका का नाकाबंदी जारी रखने के फैसले के कारण ईरान ने फिर से पाबंदियाँ लगा दीं।

‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ — और ईरान का पलटवार

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की घोषणा की एक रक्षात्मक अभियान जिसका लक्ष्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों को सुरक्षा कवच प्रदान करना था। इस मिशन में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाज़, 100 से अधिक वायु एवं समुद्री विमान, बहु-क्षेत्रीय मानव रहित प्लेटफॉर्म और 15,000 सैन्यकर्मी शामिल किए गए। लेकिन ईरान ने इस कदम को युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए कड़ा जवाब दिया। ईरान ने होर्मुज़ में अमेरिकी ध्वज वाले जहाज़ों को निशाना बनाने के लिए क्रूज़ मिसाइलें, ड्रोन और छोटी नावें भेजीं — हालाँकि कोई भी अमेरिकी जहाज़ सीधी चपेट में नहीं आया। अमेरिकी सेना ने अटैक हेलीकॉप्टरों से ईरानी नावें नष्ट कर दीं और ड्रोन मार गिराए।

दक्षिण कोरियाई जहाज़ पर हमला, UAE में आग

दक्षिण कोरिया द्वारा संचालित एक मालवाहक जहाज़ में विस्फोट और आग लगने की खबर आई। जहाज़ पर 24 चालक दल के सदस्य सवार थे — जिनमें छह दक्षिण कोरियाई नागरिक थे — और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं आई। UAE की रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान द्वारा दागी गई 15 मिसाइलों और चार ड्रोनों को रोका। फुजैरा के तटीय क्षेत्र में एक ड्रोन ने तेल भंडारण सुविधा में आग लगा दी, जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए। UAE की विदेश मंत्रालय ने इसे “एक खतरनाक उकसावा और अस्वीकार्य उल्लंघन” करार दिया। सोमवार को चार बार मिसाइल चेतावनियाँ जारी की गईं जिनमें UAE के नागरिकों को आश्रय लेने को कहा गया — युद्धविराम के बाद पहली बार ऐसा हुआ। दुबई और अबू धाबी जाने वाले कई वाणिज्यिक विमान बीच हवाई रास्ते से वापस मुड़ गए।

ट्रम्प की प्रतिक्रिया: “यह भारी गोलीबारी नहीं थी”

ABC News से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि यह “भारी गोलीबारी नहीं थी” और उन्होंने युद्धविराम उल्लंघन की बात मानने से सीधे इनकार किया। उन्होंने कहा, “जहाज़ चल रहे हैं… मैं इसकी जाँच कर रहा हूँ।” ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि “ईरान को उम्मीद करनी चाहिए कि युद्धविराम बना रहे। उनके लिए सबसे अच्छी बात यही है।” जब पूछा गया कि अगर युद्धविराम टूटा तो क्या होगा, तो उन्होंने कहा, “मैं आपको बताऊँगा, जैसे मैं बाकी सबको बताऊँगा।”दक्षिण कोरियाई जहाज़ पर हमले के बारे में ट्रम्प ने कहा, “दक्षिण कोरिया को आगे आना चाहिए। अगर आपका जहाज़ हमला किया गया है, तो आपको तुरंत अपने लोगों को भेजना चाहिए।”

CENTCOM प्रमुख और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी का बयान

CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ में छह ईरानी छोटी नावें नष्ट कर दीं — हालाँकि ईरानी सरकारी मीडिया ने इस दावे का खंडन किया। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने Fox News पर कहा कि अमेरिका के पास होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर “पूर्ण नियंत्रण” है और उन्होंने ईरानी नौसेना को “समुद्री डाकुओं का गिरोह” करार दिया।

ईरान का पक्ष: “बातचीत जारी है, लेकिन अमेरिका साजिश में फँस रहा है”| ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज़ में हुई घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि “राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है।” उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह “दुश्मनों द्वारा एक दलदल में खींचे जाने से सावधान रहे।” साथ ही उन्होंने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को “प्रोजेक्ट डेडलॉक” कहकर खारिज किया।

सऊदी अरब और क्षेत्रीय देशों की चिंता

सऊदी अरब ने इस सैन्य तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने UAE पर ईरानी हमले की निंदा करते हुए कहा कि वह युद्ध के राजनीतिक समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान की प्रभावी बंदी के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मची है। जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुज़रता है, जो दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत है। चीन अपनी एक-तिहाई तेल ज़रूरत इसी मार्ग से पूरी करता है।

आम जनता की प्रतिक्रिया

दुबई में रहने वाले एक भारतीय व्यवसायी ने बताया कि मिसाइल अलर्ट मिलने पर पूरे परिवार ने घर के अंदर आश्रय लिया। “हम यहाँ काम करने आए थे, युद्धक्षेत्र में नहीं। हमें नहीं पता था कि रात को इस तरह का सायरन सुनाई देगा।” तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान एक भारतीय ट्रक ड्राइवर ने कहा, “होर्मुज़ बंद होते ही पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं और हम जैसे आम आदमी की जेब कटती है।” दक्षिण कोरिया में हमलाग्रस्त जहाज़ के परिवारों ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की।

आगे क्या?

CENTCOM कमांडर कूपर ने यह बताने से इनकार किया कि क्या अमेरिका-ईरान युद्धविराम अब समाप्त हो गया है। ट्रम्प ने भी Fox News पर यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिकी हमला आसन्न है, जवाब दिया, “मैं आपको यह नहीं बता सकता।” CNN के राजनयिक संपादक निक रॉबर्टसन के अनुसार, युद्धविराम का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि मंगलवार को होर्मुज़ में क्या होता है — और ईरान में कट्टरपंथियों और उदारवादियों के बीच कौन-सी धारा हावी होती है। होर्मुज़ संकट अब सिर्फ एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहा — यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और एक बड़े टकराव की संभावना का सवाल बन चुका है। दुनिया की नज़रें अब अगले 24 घंटों पर टिकी हैं।​​​​​​​​​​​​​​​​

यह भी पढ़ें: भाजपा की असम में हैट्रिक, केरल में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी, पुडुचेरी में NDA का दबदबा बरकरार

यहां से शेयर करें