पवित्र गंगा की लहरों पर पहले इफ्तार पार्टी, फिर शराब पार्टी, इन दो वायरल वीडियो ने देश की धर्मनगरी काशी को सियासी आग में झोंक दिया। अब जब विवाद का धुआं थोड़ा शांत हुआ है, तो वाराणसी के नाविक समाज ने खुद ही अपनी नाव पर कड़े नियम थोप लिए हैं, मां गंगा की मर्यादा और अपनी आजीविका दोनों बचाने के लिए।
पहले इफ्तार, फिर शराब — दो वायरल वीडियो, दो अलग एक्शन
वाराणसी के कोतवाली थाने में पुलिस ने गंगा की पवित्र धारा में नाव पर इफ्तार पार्टी करने वाले मुस्लिम युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। रमजान के दौरान युवकों ने नाव पर इफ्तार करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने शिकायत में आरोप लगाया कि युवकों ने इफ्तार में चिकन बिरयानी खाकर हड्डियां गंगा में फेंकीं, जिससे पवित्र नदी अपवित्र हुई। पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया। इस मामले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तूफान की तरह फैल गया। मिर्जापुर स्थित बड़ी शीतला माता के दरबार में ‘बधावा’ ले जाने के दौरान का बताया जा रहा यह वीडियो सामने आया जिसमें कुछ युवकों ने न केवल गंगा में प्रतिबंधित डीजे बजाया, बल्कि बीच धारा में नाव रोककर शराब और कबाब की पार्टी भी की।
नाविकों ने खुद बनाए कड़े नियम
दोनों विवादों ने नाविक समाज की छवि पर गहरी चोट की। इसके बाद माझी समाज ने प्रशासन के दबाव और खुद की अंतरात्मा की आवाज पर कड़े नियम बनाए। नाव संचालकों ने शपथ ली कि वे मादक पदार्थ या शराब का सेवन करके नाव या बोट का संचालन नहीं करेंगे। नाव पर किसी भी प्रकार के नशे की अनुमति नहीं दी जाएगी। वाराणसी जिला प्रशासन ने भी सख्त नई गाइडलाइन जारी की चलती नाव में रील बनाना या खड़े होकर सेल्फी लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। बिना लाइफ जैकेट पहने किसी भी सवारी को नाव पर नहीं बिठाया जाएगा, और नाव संचालक नशे की हालत में नाव नहीं चलाएंगे। पुलिस प्रशासन ने गंगा में नाव संचालन के लिए नया रूट प्लान भी लागू किया है। अब नाव चालक गंगा के बीचोबीच अपनी मर्जी से नाव नहीं चला सकेंगे और उन्हें तय रास्ते का पालन करना होगा।
नाविकों में आक्रोश और पीड़ा दोनों
स्थानीय नाविकों में इन घटनाओं को लेकर भारी आक्रोश है। नाविकों का कहना है कि मां गंगा उनके लिए आस्था और जीवनयापन का साधन दोनों हैं। ऐसे में इस तरह की हरकतें न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि काशी की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं। वहीं नाविक समाज अपनी रोजी-रोटी को लेकर भी संकट में है। काशी में लगभग 40 हजार नाविक परिवार अपनी आजीविका के लिए नौकायन पर निर्भर हैं। बच्चों की शिक्षा, बुजुर्गों के इलाज और परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र साधन नाव संचालन ही है, जिसे वे पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। नाविक समाज ने मांग की है कि नगर निगम वाराणसी द्वारा निरस्त किए गए नाव/मोटर बोट लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए और गंगा घाटों पर वाटर टैक्सी ठेका प्रणाली को खत्म किया जाए।
राजनीतिक घमासान: अखिलेश बनाम ब्रजेश पाठक
इस पूरे प्रकरण ने यूपी की राजनीति में भी आग लगा दी। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि गंगा में नॉनवेज खाने को लेकर उठा विवाद सिर्फ बहाना है ताकि लोगों के बीच दूरी पैदा की जा सके। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि गंगा में एक लग्जरी जहाज (क्रूज) चलता है, जहां महंगी शराब परोसी जाती है और उसका कचरा भी नदी में जाता है, लेकिन उस पर कोई एक्शन नहीं होता। अखिलेश ने तंज करते हुए कहा कि उन लोगों ने पुलिस की हथेली पर ईदी नहीं रखी होगी। रख देते तो सब सही चलता। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सपा हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करती है और गलत को गलत कहने से कतराती है।
ओवैसी का तीखा हमला — ‘दोहरे मानदंड’ का आरोप
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर कुछ लोग नदी के बीच नाव पर इफ्तार करते हैं, तो इससे किसकी भावनाएं आहत हुईं? उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया और तंज कसते हुए कहा कि जब गंगा में शहर का सीवेज और गंदगी गिरती है, तब लोगों की भावनाएं क्यों नहीं जागतीं? ओवैसी ने आरोप लगाया कि इन युवाओं को सिर्फ इसलिए जेल भेजा गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं।
दोहरे मानदंड पर उठे सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद सवाल उठ रहे हैं — भारी पुलिस बल और जल पुलिस की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में युवक डीजे लेकर गंगा में कैसे दाखिल हुए? क्या घाटों पर तैनात निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि इफ्तार पार्टी पर तुरंत 14 गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन शराब पार्टी के मामले में पुलिस केवल “जांच” करती रही। विपक्ष ने इसे खुलेआम दोहरे मानदंड करार दिया।
आम जनता की राय — ‘गंगा की पवित्रता सबसे पहले’
वाराणसी के स्थानीय निवासियों, पुजारियों और घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं की राय में एक बात समान है — चाहे नॉनवेज हो, शराब हो या कोई भी अपमान, मां गंगा के साथ किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए। लेकिन साथ ही कई लोगों का यह भी कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए धर्म या समुदाय देखकर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यह विवाद केवल गंगा की पवित्रता का मामला नहीं रहा यह यूपी की राजनीति, कानून के समान प्रयोग और एक लाखों लोगों की आस्था की परीक्षा बन चुका है। आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा और गर्म होने के आसार हैं।

