तेल आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों को ‘ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम
Nitin Gadkari : नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पेट्रोल में 100% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E100) की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है। उन्होंने यह बात Indian Federation of Green Energy के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में कही।
Nitin Gadkari :
वैश्विक संकट के बीच ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर
गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट प्रभावित हैं। इससे पारंपरिक तेल सप्लाई चेन बाधित हुई है और भारत का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है।
भारत वर्तमान में अपनी करीब 87% तेल जरूरतें आयात से पूरी करता है, जिस पर हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में इथेनॉल जैसे घरेलू विकल्प पर जोर देना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
E20 से E100 तक: ईंधन में बड़ा बदलाव
देश में 1 अप्रैल 2026 से E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू हो चुका है। अब सरकार धीरे-धीरे इस अनुपात को बढ़ाकर E100 मॉडल की ओर बढ़ना चाहती है।
ब्राजील जैसे देशों में यह मॉडल पहले से सफल है और भारत भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इससे न सिर्फ तेल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ तक का सफर
गडकरी ने कहा कि इथेनॉल आधारित ईंधन नीति से किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है। कृषि अवशेष और गन्ने जैसी फसलों से इथेनॉल उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। यह कदम किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बना सकता है।
इंजन टेक्नोलॉजी में बदलाव जरूरी
हालांकि E20 का इस्तेमाल मौजूदा Internal Combustion Engine (ICE) में मामूली बदलाव के साथ संभव है, लेकिन E85 और E100 के लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) की जरूरत होगी। सरकार के आने वाले CAFE III (Corporate Average Fuel Efficiency) मानक (2027 से लागू) इस दिशा में उद्योग को प्रोत्साहित करेंगे। ऑटोमोबाइल कंपनियों के सामने चुनौती ऐसे इंजन विकसित करने की है, जो उच्च इथेनॉल मिश्रण को सुरक्षित तरीके से संभाल सकें।
ग्रीन हाइड्रोजन भी ‘फ्यूचर फ्यूल’
इथेनॉल के साथ-साथ गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन को भी भविष्य का ईंधन बताया। उनका मानना है कि यदि इसकी लागत घटाकर $1 प्रति किलोग्राम तक लाई जा सके, तो यह भारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर में क्रांति ला सकता है। फिलहाल, इथेनॉल को सबसे व्यावहारिक और तुरंत उपलब्ध विकल्प माना जा रहा है, जो एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के तहत कृषि अपशिष्ट को ईंधन में बदल सकता है।
उपभोक्ताओं पर नहीं होगा दबाव
गडकरी ने स्पष्ट किया कि सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा जरूर दे रही है, लेकिन उपभोक्ताओं पर इसे अपनाने के लिए कोई दबाव नहीं डाला जाएगा। फोकस बेहतर टेक्नोलॉजी और गुणवत्ता पर होगा, ताकि ग्रीन ईंधन और गाड़ियां खुद-ब-खुद लोगों के लिए आकर्षक बनें।
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