Hormuz Crisis: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz से जुड़ा संकट भारत के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस बीच राहत की खबर यह है कि करीब 94 हजार टन एलपीजी लेकर दो भारतीय टैंकर अगले दो दिनों में देश पहुंचने वाले हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति को मजबूती मिलेगी।
Hormuz Crisis:
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग से अब तक छह भारतीय जहाज निकल चुके हैं, जिनमें से चार भारत पहुंच चुके हैं, जबकि बाकी दो रास्ते में हैं। हालांकि, अभी भी 18 भारतीय जहाज होर्मुज के पश्चिमी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित वापस लाना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
Hormuz Crisis:
सरकार का फोकस: पहले जहाजों और नाविकों की सुरक्षित वापसी
जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान हालात को देखते हुए सरकार का पहला लक्ष्य खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों को सुरक्षित स्वदेश लाना है। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। इन 18 जहाजों में कुल 484 भारतीय नाविक सवार हैं, जो फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं। पिछले 72 घंटों से स्थिति स्थिर बनी हुई है। सरकार अब तक करीब 950 भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारत वापस ला चुकी है।
एलपीजी खरीद पर फिलहाल रोक
सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा हालात ऐसे नहीं हैं कि वहां से नई एलपीजी खरीद की जा सके। इसलिए जो टैंकर भारत आ रहे हैं, उन्हें फिलहाल दोबारा एलपीजी लाने के लिए वापस नहीं भेजा जाएगा।
बढ़ता खतरा: खाड़ी क्षेत्र बना हाई-रिस्क जोन
क्षेत्र में तनाव बढ़ने की एक बड़ी वजह Houthi movement द्वारा इजरायल पर किए गए हमले भी हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। इसके चलते समुद्री मार्ग से माल ढुलाई महंगी और जोखिम भरी हो गई है।
विदेशी जहाज भी फंसे, सप्लाई पर असर
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि होर्मुज के पश्चिम में कच्चे तेल से भरे चार और एलएनजी से लदे तीन विदेशी जहाज भी फंसे हुए हैं, जिनसे भारत को आपूर्ति होनी थी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?
भारत का लगभग 95% अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्ग से होता है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी विदेशी जहाजों की है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता जोखिम सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार लागत को प्रभावित कर सकता है।
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