मामले की पृष्ठभूमि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा ताल में जनसुराज पार्टी (प्रशांत किशोर) के समर्थक 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। अनंत सिंह पर मुख्य आरोपी होने का आरोप लगा। 1-2 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके बावजूद अनंत सिंह ने जेल से चुनाव जीता और विधायक बने। निचली अदालत (सिविल कोर्ट और एमपी-एमएलए कोर्ट) ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन हाईकोर्ट ने आज राहत दी।
समर्थकों की प्रतिक्रिया अनंत सिंह के चाहने वाले और जदयू कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे हैं। मोकामा और आसपास के इलाकों में समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। एक समर्थक ने कहा, “छोटे सरकार का जादू फिर चला! हाईकोर्ट ने सच्चाई देखी। अब वह जल्द बाहर आएंगे और मोकामा का विकास करेंगे।” कई कार्यकर्ता जेल के बाहर इंतजार में हैं। अनंत सिंह ने राज्यसभा वोटिंग के दौरान (16 मार्च) खुद कहा था, “जल्द जेल से बाहर आऊंगा” – और उनका वादा पूरा होता दिख रहा है। “समर्थकों में खुशी की लहर” है और शनिवार तक रिहाई तय मानी जा रही है।
विरोधियों और परिवार की प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ, दुलारचंद यादव के परिवार और विरोधी खेमे में गुस्सा और निराशा है। मृतक के पोते गगन यादव ने पहले ही फांसी की मांग की थी। आज की जमानत पर परिवार ने कहा, “यह न्याय की हत्या है। राजनीतिक दबाव में कोर्ट ने आरोपी को राहत दी। हम हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।” जनसुराज पार्टी समर्थक और विपक्षी नेता इसे “राजनीतिक साजिश” और “बाहुबली को बचाने की कोशिश” बता रहे हैं। एक स्थानीय नेता ने कहा, “चुनावी हिंसा का आरोपित विधायक जेल से बाहर आ रहा है, तो आम आदमी का न्याय कहां है?” परिवार का कहना है कि पोस्टमॉर्टम और गवाहों के बावजूद बेल मिलना “पीड़ितों के साथ अन्याय” है।
अनंत सिंह के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि मौत गोली से नहीं, लाठी और वाहन से कुचलने से हुई और अनंत सिंह मौके पर फायरिंग में शामिल नहीं थे। अब कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई होगी। यह घटना बिहार राजनीति में फिर चर्चा का विषय बन गई है – जदयू में खुशी तो परिवार और जनसुराज समर्थकों में रोष। मामले में आगे क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी।

