मोदी का इजराइल दौरा: यात्रा के पहले दिन बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल की संसद ‘नैसेट’ को संबोधित किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला ऐसा ऐतिहासिक संबोधन था, जिसे standing ovation मिला। मोदी ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की कड़ी निंदा की और कहा, “किसी भी कारण से निर्दोष नागरिकों की हत्या जायज नहीं।” इसके बाद बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भव्य डिनर हुआ।
आज गुरुवार को दूसरे दिन मोदी ने होलोकॉस्ट स्मारक ‘याद वासेम’ का दौरा किया, जहां उन्होंने नाजी अत्याचारों में शहीद हुए यहूदियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई। पीएम मोदी ने हर्जोग को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव (विशेषकर ईरान-अमेरिका संबंधों की बिगड़ती स्थिति) के बीच यह यात्रा रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दे रही है। दोनों देश पहले से ही ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और कृषि-टेक में करीबी साझेदार हैं।
कार्नी का भारत दौरा: कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी पहली भारत यात्रा पर 27 फरवरी को मुंबई पहुंचेंगे। यात्रा 2 मार्च तक चलेगी, जिसमें दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। कार्नी ने खुद को ‘मिडिल-पावर’ देशों का चैंपियन बताया है और ट्रूडो सरकार के दौरान खालिस्तान विवाद से बिगड़े संबंधों को सुधारने का संकल्प भी लिया है।
मुख्य एजेंडा: मुक्त व्यापार समझौता (FTA) की बातचीत फिर शुरू करना • व्यापार, निवेश, ऊर्जा, AI, टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र में नए डील • कनाडा की अर्थव्यवस्था को चीन-निर्भरता से मुक्त करने के लिए भारत को वैकल्पिक भागीदार बनाना, कार्नी ने पिछले कुछ महीनों में कई कदम उठाए हैं, जिनमें खालिस्तान समर्थक तत्वों पर सख्ती और आर्थिक सहयोग पर फोकस शामिल है।
विश्लेषकों का मत: दोनों यात्राएं एक साथ दिखाती हैं कि भारत ‘मल्टी-एलाइनमेंट’ की नीति के तहत रणनीतिक (इजराइल) और आर्थिक (कनाडा) दोनों मोर्चों पर सक्रिय है। एक ओर मध्य पूर्व की अस्थिरता के बीच इजराइल के साथ गहरे संबंध, तो दूसरी ओर कनाडा जैसे विकसित देश के साथ पुराने विवादों को पीछे छोड़कर नया अध्याय शुरू करना – यह भारत की परिपक्व और आत्मविश्वासपूर्ण विदेश नीति का प्रमाण है। दोनों घटनाओं पर नजर रखने वाले राजनयिक सूत्रों का कहना है कि मार्च के पहले सप्ताह में भारत की कूटनीति काफी व्यस्त रहने वाली है। पूरी दुनिया इन विकासों पर नजरें जमाए हुए है।

