इन्फ्लुएंसर ने धार्मिक गुरुओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कई मौलवी और पंडित दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, लेकिन खुद महिलाओं के शोषण में लिप्त रहते हैं। उन्होंने पूर्व अभिनेत्री सना खान और उनके पति का उदाहरण देते हुए बताया कि हिजाब पहनकर विदेशों में लग्जरी जीवन जीना और फिर धर्म का उपदेश देना एक स्पष्ट दोहरा मापदंड है। “यह धार्मिक पाखंड की मिसाल है, जहां दिखावा तो पवित्रता का होता है, लेकिन असलियत कुछ और ही है,” उन्होंने कहा।
वैलेंटाइन डे को लेकर इन्फ्लुएंसर का मत है कि यह दिन खुद में खराब नहीं है, बल्कि लोगों की नियत खराब होती है। उन्होंने मौलानाओं की जांच कराने की चुनौती दी और दावा किया कि उनके भी कई प्रेम संबंध हो सकते हैं। “अगर जांच हो तो पता चलेगा कि ये उपदेशक खुद क्या कर रहे हैं,” उन्होंने जोर देकर कहा। इस्लामिक विद्वानों ने भी वैलेंटाइन डे को हराम बताते हुए मुसलमानों को इससे दूर रहने की सलाह दी है। उदाहरण के लिए, मुहम्मद सईद नूरी ने कहा कि “वैलेंटाइन डे इस्लाम में कोई जगह नहीं रखता, यह नाजायज और हराम है।” उन्होंने देशभर के इमामों से मस्जिदों में इसकी घोषणा करने की अपील भी की।
प्रेम की परिभाषा पर बात करते हुए इन्फ्लुएंसर ने कहा कि प्रेम करना बुरी बात नहीं है, लेकिन इसका मतलब शोषण नहीं होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि आजकल प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण और ‘बिस्तर’ तक सीमित रह गया है, जो जानवरों के व्यवहार जैसा है। “सच्चा प्रेम सम्मान और समर्पण पर आधारित होना चाहिए, न कि क्षणिक सुख पर,” उन्होंने जोर दिया। इसी क्रम में, सोशल मीडिया पर एक यूजर ने वैलेंटाइन डे को ‘कामवासना दिवस’ बताते हुए चेतावनी दी कि यह बॉलीवुड, मीडिया और विदेशी कंपनियों द्वारा प्रचारित एक बड़ा बिजनेस है, जो युवाओं, खासकर लड़कियों को फंसाता है।
समाज की मौजूदा स्थिति पर इन्फ्लुएंसर ने कहा कि बढ़ती नग्नता और होटलों में पकड़े जाने वाले मामलों से साफ है कि नैतिकता गिर रही है। “किसी भी धर्म में प्रेम को बुरा नहीं कहा गया है, लेकिन आज लोग हर वैलेंटाइन डे पर साथी बदल लेते हैं और शादीशुदा होने के बावजूद गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड रखते हैं,” उन्होंने अफसोस जताया। 2026 के वैलेंटाइन डे पर बाजरंग दल जैसे संगठनों ने कैंपस और पार्कों में छापेमारी की, जहां वे कपल्स को परेशान करते नजर आए। लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये संगठन रेप जैसे गंभीर मामलों पर चुप रहते हैं, जो उनकी दोहरी नैतिकता को दर्शाता है। एक इंस्टाग्राम रील में इसे ‘नकली नैतिकता और कायरता’ बताया गया, जहां कहा गया कि “प्यार पर हमला करना आसान है, लेकिन असली हिंसा पर आवाज नहीं उठाते।”
इस बहस में हिंदुत्व संगठनों की भूमिका भी चर्चा में है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि राइट-विंग ग्रुप्स वैलेंटाइन डे को ‘पश्चिमी जहर’ बताते हैं, लेकिन यह उनकी असुरक्षा को दर्शाता है, क्योंकि प्यार जाति, धर्म और लिंग की दीवारें तोड़ता है। वहीं, कुछ मुस्लिम यूजर्स ने वैलेंटाइन डे को ‘जिना और विद्रोह’ को बढ़ावा देने वाला बताया और मुसलमानों को इससे दूर रहने की सलाह दी। कुल मिलाकर, वैलेंटाइन डे 2026 ने एक बार फिर समाज को आईना दिखाया है कि प्रेम की आड़ में पाखंड और शोषण कितना फैल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि असली समस्या नियत और शिक्षा में है, न कि किसी त्योहार में।

