Avimukteshwarananda is now embroiled in a POCSO case: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, पॉक्सो कोर्ट ने दिए FIR दर्ज कर जांच के आदेश

Avimukteshwarananda is now embroiled in a POCSO case: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक कानूनी विवाद में घिर गए हैं। शनिवार को वाराणसी की एक विशेष अदालत (पॉक्सो एक्ट) ने एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए शंकराचार्य सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ एफ़आइआर (FIR) दर्ज करने और पूरे मामले की विवेचना (जांच) करने का आदेश दिया है।

यह आदेश विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने जारी किया। कोर्ट के इस फैसले के बाद धार्मिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

मामले का मुख्य विवरण

यह मामला मुख्य रूप से एक नाबालिग के संरक्षण और उससे जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित बताया जा रहा है।

  • शिकायतकर्ता का पक्ष: याचिकाकर्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनके संरक्षण में रहने वाले नाबालिग के संदर्भ में कुछ ऐसी गतिविधियाँ हुईं जो कानून सम्मत नहीं थीं। इसमें शंकराचार्य और उनके कुछ सहयोगियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
  • अदालत की टिप्पणी: विशेष न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत किए गए प्रारंभिक तथ्यों को देखते हुए माना कि इस प्रकरण में पुलिसिया जांच आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय के हित में आरोपों की तह तक जाना जरूरी है, जिसके लिए प्राथमिकी दर्ज होना अनिवार्य है।

पूरे मामले की पृष्ठभूमि (Background)

यह विवाद काफी समय से चर्चा में रहा है, लेकिन अब कानूनी रूप से इसमें नया मोड़ आ गया है:

  1. वर्चस्व और विवाद: अविमुक्तेश्वरानंद अक्सर अपने बेबाक बयानों और धार्मिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, इस मामले ने उनकी छवि के सामने एक नई कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है।
  2. पॉक्सो एक्ट का जुड़ाव: चूंकि यह मामला विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत में था, इसलिए इसमें नाबालिग के अधिकारों के उल्लंघन या उससे जुड़े गंभीर आरोपों की संभावना जताई जा रही है।
  3. पुलिस की भूमिका: इससे पहले इस मामले में पुलिस की कार्यवाही को लेकर शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं था, जिसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। अब कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित थाने को रिपोर्ट दर्ज कर प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

आगे क्या होगा?

कोर्ट के आदेश के बाद अब स्थानीय पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करना होगा। इसके बाद:

  • आरोपियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
  • साक्ष्यों (Evidence) का संकलन किया जाएगा।
  • यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो पुलिस आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करेगी।

नोट: अभी यह केवल प्राथमिकी दर्ज करने और जांच का आदेश है। दोषसिद्धि या निर्दोषता का फैसला पुलिस की अंतिम रिपोर्ट और अदालती ट्रायल के बाद ही होगा।

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