Can a ₹1 lakh fine stop “hate journalism”?: NBDSA ने Zee News पर लगाया ₹1 लाख जुर्माना, माफी + वीडियो हटाने का आदेश; सोशल मीडिया वेरिफिकेशन पर नई सख्त गाइडलाइंस

Can a ₹1 lakh fine stop “hate journalism”?: न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने Zee News पर एक बार फिर कार्रवाई की है। 17 फरवरी 2026 को जारी आदेश में चैनल पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया है। मामला मार्च 2025 में प्रसारित कार्यक्रम “ट्रक पर नमाज़…जम्मू में नया बवाल शुरू!” का है, जिसमें एक अनवेरिफाइड वायरल वीडियो को इस तरह पेश किया गया कि मुस्लिम ट्रक ड्राइवर की नमाज़ पढ़ने से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर जाम लग गया। वास्तविक वजह लैंडस्लाइड और सड़क की मरम्मत थी।

NBDSA के चेयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) ए.के. सिकरी की एकल सदस्यीय बेंच ने पाया कि प्रसारण “Accuracy” और “Neutrality” के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। चैनल ने वीडियो पर “अनवेरिफाइड” का डिस्क्लेमर दिया था, लेकिन NBDSA ने साफ कहा—“सिर्फ डिस्क्लेमर देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।”

शिकायत और फैसला
शिकायतकर्ताओं में इंद्रजीत घोरपड़े, उत्कर्ष मिश्रा और जामियत उलेमा-ए-हिंद के कानूनी सलाहकार सैयद काब राशिदी शामिल थे। NBDSA ने Zee News को निर्देश दिया:
• सभी प्लेटफॉर्म्स (वेबसाइट, यूट्यूब, डिजिटल) से वीडियो 7 दिनों में हटाएं (अगर अभी भी उपलब्ध है)।निर्धारित फॉर्मेट में ऑन-एयर माफी प्रसारित करें। ₹1 लाख जुर्माना जमा करें। NBDSA ने नोट किया कि चैनल ने बाद में वीडियो खुद डिलीट कर दिया था, इसलिए भारी जुर्माना नहीं लगाया।

सोशल मीडिया कंटेंट पर नई 6 गाइडलाइंस
इस आदेश के साथ NBDSA ने ब्रॉडकास्टर्स के लिए सोशल मीडिया सामग्री इस्तेमाल करने पर सख्त दिशानिर्देश जारी किए:
1. किसी भी वीडियो/इमेज/खबर को ब्रॉडकास्ट से पहले सख्त वेरिफिकेशन जरूरी।
2. ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, आंखों देखी गवाही या सरकारी आधिकारिक स्रोत से क्रॉस-चेकिंग अनिवार्य।
3. सामग्री में विकृति, एआई जेनरेशन या मैनिपुलेशन की जांच (जितना संभव हो)।
4. संदर्भ से बाहर पेश नहीं करना।
5. संवेदनशील मुद्दों (सांप्रदायिक, हिंसा, सार्वजनिक अशांति) पर उच्च स्तर की जांच और पब्लिक इंटरेस्ट टेस्ट।
6. “अनवेरिफाइड” डिस्क्लेमर पर्याप्त नहीं—पूर्ण जिम्मेदारी ब्रॉडकास्टर की।

Zee News का इतिहास: 27 बार सजा
Newslaundry की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से अब तक Zee News के खिलाफ NBDSA के लगभग 27 आदेश आ चुके हैं—ज्यादातर सांप्रदायिक पूर्वाग्रह और गलत रिपोर्टिंग के। 2023 में इंटरफेथ रिलेशनशिप डिबेट और “लैंड जिहाद” कवरेज में भी जुर्माना और माफी का आदेश मिल चुका है।

सेल्फ-रेगुलेशन पर्याप्त? बहस तेज
NBDSA एक स्वैच्छिक सेल्फ-रेगुलेटरी बॉडी है। इसका कोई लाइसेंस रद्द करने या भारी आर्थिक सजा का अधिकार नहीं। कई मीडिया विश्लेषक और पत्रकार (जैसे द फेडरल और आर्टिकल-14 में चर्चा) सवाल उठा रहे हैं—क्या ₹1 लाख (लगभग $1,200) का जुर्माना TRP के लिए “नफरती नैरेटिव” चलाने वाले चैनलों को रोक पाएगा? दूसरी तरफ NBDSA का तर्क है कि नए गाइडलाइंस और लगातार कार्रवाई से जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा मिलेगा। Zee News की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि डिजिटल युग में वायरल क्लिप्स की रफ्तार और TRP की होड़ में सत्य और संवेदनशीलता कितनी आसानी से कुर्बान की जा रही है। NBDSA के नए कदम को सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन सवाल बरकरार है—क्या छोटे जुर्माने बड़े नैरेटिव को बदल पाएंगे? स्थिति पर नजर रखी जा रही है। कोई नया अपडेट आने पर तुरंत सूचित किया जाएगा।

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