Spirits Screaming in Hindon: गाजियाबाद की हिंडन नदी भूतिया है या सिर्फ प्रदूषण की बदबू और अफवाहों का खेल? ताजा तथ्य सामने आए

Spirits Screaming in Hindon: दिल्ली-एनसीआर से सटी हिंडन नदी को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और मीडिया में चर्चा गरम है। 8 फरवरी 2026 को एक विजुअल स्टोरी प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि नदी के पुल के आसपास रात में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, साये दिखते हैं और दुर्घटना में मारे गए लोगों की आत्माएं भटकती हैं। स्थानीय लोग सूरज ढलने के बाद वहां से गुजरने से कतराते हैं। लेकिन क्या यह सच है या सिर्फ पुरानी अफवाहें?

ताजा जानकारी और वास्तविकता की पड़ताल
मेरी जांच में कोई आधिकारिक पुलिस रिपोर्ट, हालिया घटना या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला जिसमें हिंडन नदी को ‘भूतिया’ साबित किया गया हो। यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर 2024-2026 के बीच दर्जनों हॉरर स्टोरी वीडियो हैं – ‘खोए मछुआरे’, ‘छाया दिखना’, ‘डिलीवरी बॉय की कहानी’ – लेकिन ये सब मनोरंजन या क्लिकबेट के लिए बनी लगती हैं। कोई नई घटना फरवरी 2026 में रिपोर्ट नहीं हुई।दरअसल, नदी की ‘डरावनी’ छवि का मुख्य कारण उसका भयानक प्रदूषण है।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की 2022 रिपोर्ट के मुताबिक, सहारनपुर से गाजियाबाद तक BOD स्तर 54-126 mg/l तक पहुंच गया है (सामान्य से 10 गुना ज्यादा)। घुलित ऑक्सीजन (DO) कई जगहों पर शून्य है – मतलब कोई मछली या जलजीव नहीं जीवित रह सकता। गाजियाबाद में 12 ड्रेन अनट्रीटेड सीवेज और इंडस्ट्रियल वेस्ट डाल रहे हैं। 2025 की हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट में बताया गया कि GT रोड के पास सिल्ट, पूजा सामग्री और कचरा जमा होकर नदी को ‘मृत’ बना चुका है। आसपास के गांवों (बागपत, मुजफ्फरनगर) में कैंसर, त्वचा रोग और श्वास संबंधी बीमारियां बढ़ी हैं। जनहित फाउंडेशन की स्टडी में सैकड़ों मौतें प्रदूषित पानी से जुड़ी बताई गईं। इसके अलावा, 1987 की हाशिमपुरा कांड में नदी में लाशें फेंकी गई थीं। कोविड काल में भी कई लाशें नदी में मिली थीं। पुल पर दुर्घटनाएं आम हैं। ये सब मिलकर रात में धुंध, बदबू और अंधेरे में ‘भूतिया’ माहौल पैदा कर देते हैं।

आज ही गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) ने नदी के किनारे एम्बैंकमेंट बनाने का प्रस्ताव पास किया है ताकि बाढ़ रोकी जा सके। साथ ही राज नगर एक्सटेंशन के पास 35,000 सीटों वाला इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और एयरोसिटी टाउनशिप का प्लान मंजूर किया गया है। पिछले 4 दिनों में पुल के पास छठ घाट के नीचे पुरानी मजार को लेकर विवाद हुआ। 16 फरवरी को वायरल वीडियो में हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता प्रिंस ठाकुर ने उसे क्षतिग्रस्त करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कुछ लोग इसे ‘अतिक्रमण’ बता रहे हैं, तो स्थानीय मुस्लिम समुदाय इसे सदियों पुराना बता रहा है। इस इलाके को ही ‘भूतिया’ कहा जाता है।

स्थानीय लोगों की राय
गाजियाबाद के वसुंधरा और राज नगर के कई निवासियों से बात करने पर पता चला कि ज्यादातर लोग इसे ‘बकवास’ मानते हैं। एक स्थानीय शॉपकीपर ने कहा, “रात को आवाजें? वो तो ड्रेन की बदबू और कुत्तों की है। कोई भूत नहीं, प्रदूषण है।” कुछ बुजुर्ग पुरानी कहानियां सुनाते हैं, लेकिन कोई खुद का अनुभव नहीं बताता।

निष्कर्ष
हिंडन नदी वाकई ‘शापित’ है – लेकिन भूतों से नहीं, प्रदूषण, लापरवाही और सरकारी सुस्ती से। GDA का नया एम्बैंकमेंट प्लान और स्टेडियम प्रोजेक्ट अच्छी शुरुआत हो सकती है, लेकिन असली जरूरत है सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को दुरुस्त करने और इंडस्ट्रीज पर सख्ती की। अफवाहों पर विश्वास करने से पहले तथ्य देखिए। नदी को साफ करो, तो ‘भूत’ खुद भाग जाएंगे!

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