Power struggle in the UP BJP?: उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक के बीच शंकराचार्य विवाद को लेकर सार्वजनिक मतभेद साफ दिखने लगे हैं। जहां योगी ने विधानसभा में संविधान की सर्वोच्चता और अनुशासन पर जोर दिया है, वहीं बृजेश पाठक ने बटुक ब्राह्मणों की शिखा खींचने को ‘महापाप’ करार दिया और कल अपने आवास पर 101 बटुकों का भव्य सम्मान किया। वरिष्ठ पत्रकार राजशेखर त्रिपाठी इसे “दिल्ली बनाम लखनऊ” की लड़ाई बता चुके हैं। इसी बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कल-परसों तीनों नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की, जिससे 2027 के चुनावी समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।
शंकराचार्य विवाद की जड़ माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच झड़प हुई। कथित तौर पर युवा ब्राह्मण शिष्यों (बटुकों) की शिखा खींची गई। शंकराचार्य ने योगी सरकार पर ‘एंटी-हिंदू’ और ‘एंटी-ब्राह्मण’ होने का आरोप लगाया तथा 40 दिन का अल्टीमेटम दिया (अब 20 दिन बीत चुके हैं)। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को “लखनऊ चलो” मार्च निकालेंगे और घोषणा करेंगे कि योगी “असली हिंदू” हैं या नहीं।
योगी का रुख विधानसभा में योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कहा- “संविधान सबसे ऊपर है, कोई भी खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता। अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।” उन्होंने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। बृजेश पाठक का आक्रामक मोर्चा ब्राह्मण चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले डिप्टी CM बृजेश पाठक ने साफ कहा- “बटुकों की शिखा खींचने वालों को महापाप लगेगा। किसी को टच करने का अधिकार नहीं। कड़ी कार्रवाई हो।” कल (19 फरवरी) उन्होंने लखनऊ के सरकारी आवास पर 101 बटुकों को बुलाया, पत्नी नम्रता पाठक के साथ तिलक लगाया, पूजा कराई और सम्मानित किया। यह ब्राह्मणों में नाराजगी दूर करने की बड़ी कवायद मानी जा रही है।
एक साक्षात्कार में पाठक का विस्फोटक बयान और भी चर्चित है- “हमारा मुंह मत खुलवाइए, अपनी रिसर्च टीम से कहिए कि रिसर्च करें।” यह योगी के भाजपा में आने और हिंदू युवा वाहिनी बैकग्राउंड पर सीधा इशारा माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पाठक को हाल ही में दिल्ली बुलाया गया था और उन्हें “आश्वासन” मिला हो सकता है। केशव मौर्य का अलग नोट डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने भी शंकराचार्य मुद्दे पर मध्यस्थता की कोशिश की और अलग सुर अपनाया। मौर्य का योगी के प्रति रुख पहले से ही स्पष्ट माना जाता है।
आरएसएस का हस्तक्षेप 19 फरवरी शाम योगी ने भागवत से 30-40 मिनट मुलाकात की। 20 फरवरी सुबह भागवत ने मौर्य और पाठक से अलग-अलग 10-30 मिनट बात की। सूत्र बताते हैं कि 2027 के चुनावी रणनीति, हिंदुत्व एजेंडा, सामाजिक एकता और ब्राह्मण-ठाकुर समीकरण पर चर्चा हुई। RSS सूत्रों का कहना है कि संघ अंततः योगी के पीछे खड़ा रहेगा, लेकिन जातीय समीकरण साधने की कोशिश चल रही है। 2027 का गणित और विपक्षी खुशी राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एसके द्विवेदी इसे “प्राकृतिक पावर टसल” बता रहे हैं। ब्राह्मणों में नाराजगी के बीच पाठक को ब्राह्मण चेहरा बनाकर साधने की कोशिश है। अधिकांश विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा योगी को हटाने का जोखिम नहीं लेगी, क्योंकि इससे चुनाव हारने का खतरा है। अखिलेश यादव और विपक्ष इस फूट का खुलकर फायदा उठा रहा है।
योगी का भविष्य
सूत्रों के अनुसार योगी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद मठ में वापस लौटेंगे। केंद्र में मंत्री पद लेने की उनकी कोई रुचि नहीं है।
स्थिति पर सभी की नजर है। अगर मतभेद और बढ़े तो 2027 से पहले बड़ा कैबिनेट फेरबदल या संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। भाजपा नेतृत्व अब चुप्पी साधे हुए है, लेकिन अंदरूनी हलचल तेज है।

