Akhilesh Yadav’s social media strategy: समाजवादी पार्टी (एसपी) के प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। एक ओर जहां उन्होंने रॉक बैंड मेटालिका के गाने ‘नथिंग एल्स मैटर्स’ के साथ इंस्टाग्राम रील पोस्ट कर उत्तर प्रदेश के विकास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विकास पिच का जवाब दिया, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 की ‘बदइंतजामी’ को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देखें तो अखिलेश की रणनीति साफ नजर आती है – आधुनिक संगीत और टेक्नोलॉजी के जरिए युवाओं को जोड़ते हुए भाजपा की कमियों को उजागर करना।
मेटालिका रील: विकास का ‘मेटाल्ड’ जवाब, मेटलहेड्स हुए हैरान
पिछले हफ्ते अखिलेश ने इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की, जिसमें ऊंटों को ट्रक में ले जाते हुए दिखाया गया है। बैकग्राउंड में मेटालिका का हिट गाना ‘नथिंग एल्स मैटर्स’ बज रहा है। कैप्शन में उन्होंने लिखा, “हवाई जहाज से लेकर ‘रेगिस्तान के जहाज’ तक, हमारी [एसपी] द्वारा बनाई गई आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सबकी सेवा कर रही है।” यह रील योगी सरकार की विकास योजनाओं का जवाब थी, जिसमें अखिलेश ने अपनी सरकार के समय बने एक्सप्रेसवे की तारीफ की।
लेकिन गाने का चुनाव लोगों को हैरान कर गया। मेटल संगीत के फैन्स (मेटलहेड्स) ने इसे राजनीतिक संदर्भ में इस्तेमाल होने पर मजाक उड़ाया, जबकि कुछ ने इसे अखिलेश की रॉक और मेटल म्यूजिक की पसंद का नमूना बताया जा रहा है। 2012 के एक इंटरव्यू में अखिलेश ने खुद को मेटालिका, गन्स एन रोजेज, क्वीन और बॉन जोवी का फैन बताया था। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कमेंट किया कि क्या यह रैंडम चॉइस था या ‘ट्रस्ट योरसेल्फ’ जैसे गाने के थीम से जुड़ा राजनीतिक मैसेज। रील को अब तक लाखों व्यूज मिल चुके हैं, और यह यूपी की राजनीति में एक अनोखा ट्विस्ट लाया है। ताजा अपडेट्स के मुताबिक, भाजपा समर्थकों ने इसे ‘पश्चिमी प्रभाव’ बताकर ट्रोल किया, लेकिन अखिलेश के युवा फॉलोअर्स ने इसे ‘कूल’ करार दिया।
एआई समिट की आलोचना: ‘भाजपा की जगह एआई संभालता तो बेहतर होता’
दूसरी ओर, अखिलेश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 की ‘मिसमैनेजमेंट’ पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समिट में चोरियां हुईं, स्टॉल्स से सामान गायब हुए, और सुरक्षा के नाम पर विजिटर्स को परेशान किया गया। “कल भाजपाई मंत्री ने बदइंतजामी और चोरी के लिए माफी मांगी, अब दिल्ली के जाम के लिए मांगेंगे। बोर्ड एग्जाम के बीच बच्चे जाम में फंसे हैं,” उन्होंने लिखा। अखिलेश ने तंज कसा कि “एआई समिट का इंतजाम भाजपाई की जगह एआई को दे देते तो देश की इमेज खराब नहीं होती।”
ताजा जानकारी के अनुसार, समिट के पहले दिन भारी भीड़, सिक्योरिटी चेक में देरी, फूड-वॉटर की कमी और इंटरनेट की समस्या ने हंगामा मचा दिया। कुछ एक्जिबिटर्स ने दावा किया कि उनके स्टॉल से सामान चोरी हो गया, जैसे नियोसैपियन वियरेबल्स। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने माफी मांगी और कहा कि “यह दुनिया का सबसे बड़ा एआई समिट है, हम सुधार करेंगे।” लेकिन विपक्ष ने इसे नहीं छोड़ा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे ‘पीआर हंग्री’ सरकार का ‘अटर कैओस’ बताया, जबकि राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि समिट में चाइनीज प्रोडक्ट्स दिखाए जा रहे हैं, जो ‘इंडियन डेटा की बिक्री’ जैसा है। गलगोटियास यूनिवर्सिटी के चाइनीज रोबोटिक डॉग विवाद ने भी आग में घी डाला। नेटिजन्स ने ‘नो यूपीआई, पैची इंटरनेट’ जैसी शिकायतें कीं।
दोनों घटनाओं का कनेक्शन: अखिलेश की ‘मॉडर्न’ राजनीति
ये दोनों घटनाएं अखिलेश की सोशल मीडिया स्ट्रैटेजी को दर्शाती हैं। एक ओर रॉक म्यूजिक से युवाओं को आकर्षित करना, दूसरी ओर टेक इवेंट की आलोचना से भाजपा की ‘डिजिटल इंडिया’ की पोल खोलना। यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और अखिलेश 2024 लोकसभा में भाजपा को कड़ी टक्कर दे चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह ‘अर्बन यूथ’ और ‘टेक-सेवी’ वोटर्स को टारगेट करने की कोशिश है। भाजपा ने जवाब में कहा कि अखिलेश ‘नकारात्मक राजनीति’ कर रहे हैं। समिट के दूसरे दिन सुधार के दावे किए गए हैं, लेकिन विवाद थम नहीं रहा। अखिलेश की ये पोस्ट्स सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं, और यूपी की राजनीति में नया रंग भर रही हैं।

