समिट के एक्सपो एरिया में गलगोटियास ने एक रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को दिखाया था, जिसे कम्युनिकेशंस प्रोफेसर नीहा सिंह ने यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित बताया था। उन्होंने कहा कि यह रोबोडॉग कैंपस में ऑटोनॉमस तरीके से घूमकर सर्विलांस करता है और यूनिवर्सिटी के 350 करोड़ रुपये के एआई इनिशिएटिव का हिस्सा है। लेकिन जल्द ही सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे यूनिट्री गो2 (Unitree Go2) पहचान लिया – यह चाइनीज कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का कमर्शियल प्रोडक्ट है, जो भारत में करीब 2.3 लाख रुपये में उपलब्ध है।
वायरल वीडियो और फैक्ट-चेक के बाद यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि “हमने कभी दावा नहीं किया कि हमने इसे बनाया है, यह स्टूडेंट्स के लिए लर्निंग टूल है।” लेकिन एक्स पर कम्युनिटी नोट ने इसे गलत बताया और कहा कि प्रेजेंटेशन में स्पष्ट रूप से “डेवलप्ड बाय यूनिवर्सिटी” कहा गया था। सरकार के निर्देश पर बुधवार दोपहर तक यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल खाली करना पड़ा। स्टॉल से बिजली कट गई और पवेलियन खाली हो गया। विपक्ष ने इसे “चाइनीज प्रोडक्ट को इंडियन इनोवेशन दिखाने” का मामला बताकर मोदी सरकार पर निशाना साधा दिया।
लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। इसी दिन प्रोफेसर नीहा सिंह का एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी द्वारा बनाए गए “सॉकर ड्रोन” को दिखाया था। उन्होंने दावा किया कि “एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग कैंपस में हुई है” और “यह भारत का पहला ऑन-कैंपस ड्रोन सॉकर एरिना है, जिसमें सिमुलेशन लैब और एप्लिकेशन एरिना है।” उन्होंने इसे “एन्हांस्ड फीचर्स” के साथ विकसित बताया।
सोशल मीडिया और टेक उत्साही यूजर्स ने तुरंत इसे साउथ कोरिया की हेल्सेल ग्रुप (Helsel Group) का स्ट्राइकर V3 ARF प्रोफेशनल ड्रोन सॉकर सेट बताया। यह प्रोडक्ट skyballdrone.com पर करीब 453 डॉलर (लगभग 40,800 रुपये) में उपलब्ध है। ड्रोन सॉकर एक उभरता हुआ इंडोर स्पोर्ट है, जिसमें 3-5 प्लेयर्स की टीम ड्रोन को गोल में डालकर पॉइंट्स बनाती है – जैसे बास्केटबॉल लेकिन ड्रोन से। हेल्सेल ने 2015 में इसकी शुरुआत की और 2017 में साउथ कोरिया में लॉन्च किया। विश्व एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन के तरफ़ से भी इसे मान्यता मिल चुकी है।
युवा कांग्रेस ने तंज कसा: “पहले चीन, अब कोरिया। गलगोटियास ‘उधार की इनोवेशन’ की वर्ल्ड टूर पर है। आत्मनिर्भर या ‘आत्मनिर्भर-बाय’?” कई यूजर्स ने इसे “इंटरनेशनल बेज्जती” करार दिया है। यूनिवर्सिटी ने अभी तक इस नए दावे पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है, लेकिन नीहा सिंह ने पहले विवाद पर कहा था कि “शायद कम्युनिकेशन ठीक से नहीं हुआ।” यह पूरा मामला समिट की छवि पर सवाल उठा रहा है, जहां भारत की एआई क्षमता दिखानी थी। सोशल मीडिया पर मीम्स और ट्रोल्स का तूफान आ गया है, और गलगोटियास की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समिट जारी है, लेकिन यह विवाद अब तक सबसे बड़ा हंगामा बन चुका है।

