AI Impact Summit 2026: भाभा युग से सबक लेकर भारत कैसे बनेगा AI का ग्लोबल लीडर? राष्ट्रीय हित और वैश्विक सहयोग का संतुलन जरूरी

AI Impact Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन वैश्विक AI गवर्नेंस, ग्लोबल साउथ की भूमिका और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पर जोरदार चर्चा हो रही है। यह समिट ठीक उसी दोहरी चुनौती को रेखांकित कर रहा है जिसका सामना भारत ने 1955 में न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के दौर में किया था—राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक सहयोग का संतुलन।

वरिष्ठ विश्लेषक ने एक प्रतिष्ठित अख़बार में लेख लिखा है कि 1955 में होमी भाभा ने जिनेवा में पहली यूएन पीसफुल यूजेज ऑफ एटॉमिक एनर्जी कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की थी। कोल्ड वॉर के दौर में भाभा ने विकासशील देशों के लिए टेक्नोलॉजी एक्सेस की वकालत की और भारत को ब्रिज-बिल्डर बनाया था। आज AI के क्षेत्र में भारत उसी रास्ते पर जाते हुए नजर आ रहा है, घरेलू क्षमता बढ़ाते हुए अमेरिका व अन्य उन्नत देशों से साझेदारी और ग्लोबल साउथ के साथ एकजुटता।

समिट के दूसरे दिन की बड़ी बातें
एक्सपो पब्लिक के लिए खुला: आज से आम लोग AI इम्पैक्ट एक्सपो देख सकते हैं। 300 से ज्यादा एग्जीबिटर्स और 30+ देशों के पविलियन लगे हैं।
नॉलेज कम्पेंडियम्स लॉन्च: स्वास्थ्य, ऊर्जा, शिक्षा, कृषि, जेंडर एम्पावरमेंट और दिव्यांगों के लिए AI केसबुक्स जारी। ये भारत के AI-for-good मॉडल को ग्लोबल साउथ तक ले जाने का ब्लूप्रिंट हैं।
मुख्य सेशन: एप्लाइड AI पर सेमिनार, AI बाय HER ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज (महिला टेक्नोलॉजिस्ट्स के AI सॉल्यूशंस)। फ्रेंच प्रेजिडेंट इमैनुएल मैक्रों, Anthropic CEO डारियो अमोदेई, Google DeepMind चीफ डेमिस हसाबिस, मेटा के अलेक्जेंडर वांग जैसे स्पीकर्स।
भारत की स्थिति मजबूत: अमिताभ कांत ने कहा कि भारत ChatGPT को अमेरिका से 33% ज्यादा डेटा देता है। ग्लोबल साउथ को सिर्फ डेटा सोर्स नहीं बनना चाहिए। अश्विनी वैष्णव ने अगले दो साल में 200 बिलियन डॉलर निवेश की उम्मीद जताई।
बिल गेट्स की भागीदारी कन्फर्म: एपस्टीन फाइल्स विवाद के बीच अफवाहें उड़ीं, लेकिन गेट्स फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि बिल गेट्स समिट में हिस्सा लेंगे और कीनोट एड्रेस देंगे।

भाभा से आज का सबक
वरिष्ठ विश्लेषक लिखते हैं कि AI कोई सिर्फ पब्लिक गुड नहीं है—यह अर्थव्यवस्था, सेना और राजनीति बदल देगा। भारत को तीन काम करने हैं:
1. घरेलू क्षमता बढ़ाना (कंप्यूट, रिसर्च, स्किल्स, रेगुलेशन)।
2. अमेरिका व अन्य देशों से गहरी साझेदारी, बिना दूसरों को छोड़ा।
3. ग्लोबल गवर्नेंस में व्यावहारिक योगदान।

भारत ने न्यूक्लियर क्षेत्र में 1960-70 के दशक में गलतियां कीं, जिससे अलग-थलग पड़ गया। AI में वैसी गलती नहीं दोहरानी है। ग्लोबल साउथ का बड़ा हिस्सा भारत में ही है—अगर यहां AI से विकास तेज हुआ तो मॉडल दुनिया तक पहुंचेगा। समिट 20 फरवरी तक चलेगा। 100+ देशों के प्रतिनिधि जिम्मेदार AI नियमों पर चर्चा कर रहे हैं। भारत खुद को न सिर्फ ब्रिज-बिल्डर बल्कि AI के भविष्य का आर्किटेक्ट साबित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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