ग्रेटर नोएडा: भंडारे की खुशियाँ मातम में बदलीं, गड्ढे ने ली मासूम की जान, ज़िम्मेदार कौन?

Another tragic accident in Greater Noida

Greater Noida| ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली है। दनकौर क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में रविवार को 3 साल के मासूम देवांश की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब परिवार एक धार्मिक आयोजन (भंडारे) में शामिल होने गया था।

यहाँ इस हृदयविदारक घटना का विस्तृत विवरण और दिल्ली-एनसीआर में हाल के अन्य हादसों का उल्लेख दिया गया है:

बता दें कि  बुलंदशहर के सिकंदराबाद की रहने वाली अंजलि अपने 3 वर्षीय बेटे देवांश और बेटी के साथ मायके (दलेलगढ़, दनकौर) आई हुई थी। रविवार को गांव के एक मंदिर में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन था। पूरा परिवार वहां मौजूद था, तभी खेलते-खेलते देवांश अचानक गायब हो गया। काफी खोजबीन के बाद मंदिर के पास स्थित पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में बच्चे की टोपी तैरती देखी गई। जब ग्रामीणों ने गड्ढे में तलाश की, तो मासूम देवांश का शरीर मिला। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीणों का आक्रोश:

  • अनदेखी की पराकाष्ठा: ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने डेढ़ महीने पहले ही इस ‘मौत के गड्ढे’ की शिकायत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से की थी और इसे भरने या बैरिकेडिंग करने की मांग की थी।
  • माफिया का कनेक्शन: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गड्ढा खनन माफियाओं द्वारा खोदा गया था जो पिछले 6 साल से खुला पड़ा था।
  • प्राधिकरण का तर्क: प्राधिकरण का कहना है कि जिस जमीन पर गड्ढा है, वह निजी किसान की है, जबकि ग्रामीण इसे सरकारी जमीन (पशुचर) बता रहे हैं।

नोएडा और दिल्ली के हालिया हादसों की यादें हुई ताजा

यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली-एनसीआर में खुले गड्ढे या ड्रेन काल बने हों। देवांश की मौत ने पिछले कुछ हफ्तों के घावों को फिर से हरा कर दिया है:

  1. नोएडा (जनवरी 2026): महज एक महीने पहले सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार जलभराव वाले एक गहरे गड्ढे में गिर गई थी। युवराज दो घंटे तक कार की छत पर मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन समय पर रेस्क्यू न मिलने के कारण उनकी डूबने से मौत हो गई।
  2. गाजियाबाद (जनवरी 2026): युवराज की मौत के कुछ ही दिनों बाद मसुरी इलाके में 11 साल का बच्चा आहिल अपने घर के बाहर खुले नाले में गिर गया और उसकी जान चली गई।
  3. दिल्ली के पुराने हादसे: दिल्ली में भी कमल ध्यानी और बिरजू जैसे लोग सीवर और खुले मैनहोल की भेंट चढ़ चुके हैं, जो शहरी बुनियादी ढांचे की पोल खोलते हैं।

कब थमेगा यह सिलसिला?

एक मां (अंजलि) जिसने अपने मासूम को अपनी आंखों के सामने खो दिया, उसके लिए प्रशासन के ‘निजी या सरकारी जमीन’ के तर्क बेमानी हैं। दिल्ली-एनसीआर के ये हादसे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, मासूमों की बलि चढ़ती रहेगी।

 

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