Uproar over UP Police’s ‘half encounter’: सहारनपुर (यूपी)। उत्तर प्रदेश पुलिस के कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ (पैर में गोली मारकर घायल करने वाली मुठभेड़) पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। देवबंद उप कारागार में अचानक पहुंचे एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) परविंदर सिंह के सामने कई कैदियों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने का सनसनीखेज आरोप लगाया। कैदियों का दावा है कि पुलिस उन्हें उठाकर सुनसान जगह ले जाती है, पहले टॉर्चर करती है, फिर जमीन पर लिटाकर पैर पर कपड़ा रखकर गोली मारती है ताकि यह आत्मरक्षा में मुठभेड़ लगे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जज के सामने कैदियों का खुलासा घटना 12 फरवरी 2026 की है। ACJM परविंदर सिंह देवबंद जेल पहुंचे और एनकाउंटर में घायल कैदियों से सीधे बात की। एक कैदी ने कहा, “साहब, पुलिस ने हमें रास्ते से उठाया, जंगल ले जाकर पहले करंट लगाया, थर्ड डिग्री टॉर्चर किया, फिर पैर पर कपड़ा रखकर गोली मारी।” दूसरे कैदी ने बताया कि पुलिस जानबूझकर पैर में गोली मारती है ताकि अपराधी जिंदा रहे और एनकाउंटर का क्रेडिट मिले। कई कैदियों ने ऐसे ही आरोप लगाए। जज ने सभी की शिकायतें सुनीं और जांच के आदेश दे दिए है।
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद सामने आया है, जहां कोर्ट ने यूपी पुलिस के एनकाउंटरों में बार-बार पैर में गोली लगने के पैटर्न पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने इसे संदिग्ध बताया था। अब इस वायरल वीडियो से फेक एनकाउंटर के आरोपों को नई हवा मिल गई है।
क्या बंद होगा ‘पैर में गोली’ वाला एनकाउंटर? फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि ऐसे एनकाउंटर बंद होंगे। पुलिस इसे आत्मरक्षा बताती रही है, लेकिन मानवाधिकार संगठन और विपक्ष इसे फेक और अतिरिक्त न्यायिक हत्या मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यूडिशियल जांच से पारदर्शिता आएगी, लेकिन यूपी में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
दिल्ली NCR में भी पुलिस पर गंभीर आरोप दिल्ली-एनसीआर में यूपी जितने हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर नहीं होते, लेकिन पुलिस कस्टोडियल वायलेंस और टॉर्चर के आरोप आम रहे हैं। हालिया वर्षों में दिल्ली पुलिस पर फेक केस दर्ज करने, हिरासत में मारपीट और अतिरिक टॉर्चर बल प्रयोग के कई मामले सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली दंगों (2020) के दौरान पुलिस पर पक्षपात और हिंसा भड़काने के आरोप लगे। इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में कस्टोडियल डेथ्स और थर्ड डिग्री के केस रिपोर्ट हुए हैं। मानवाधिकार आयोग भी NCR पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता रहा है, हालांकि फुल एनकाउंटर जैसा पैटर्न कम है|यह घटना पुलिस सुधार और जवाबदेही की मांग को फिर से तेज कर रही है। ताजा स्थिति में जांच जारी है, और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।

