देशी शराब के दामों में वृद्धि
नई नीति में सबसे बड़ा बदलाव देशी शराब की कीमतों को लेकर है। 36% अल्कोहल वाली देशी शराब की बोतल की कीमत अब 165 रुपये की जगह 173 रुपये हो जाएगी, यानी प्रति बोतल करीब 5 रुपये की बढ़ोतरी।कुछ श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 5 से 8 रुपये तक हो सकती है। पहली बार 100 एमएल का छोटा ‘बच्चा’ पैक (42.8% तीव्रता) बाजार में आएगा, जिसकी कीमत 50 रुपये रखी गई है। अंग्रेजी शराब (IMFL) और बीयर की कीमतों में सीधा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन लाइसेंस शुल्क और कोटे में 7.5% बढ़ोतरी से इनके दाम भी प्रभावित हो सकते हैं। कुछ श्रेणियों में 10 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है।
शहरी क्षेत्रों में कोटा घटाया, ग्रामीण में यथावत या बढ़ोतरी
शहरी क्षेत्रों में देशी शराब की खिता को नियंत्रित करने के मकसद से दुकानों का कोटा घटाया जाएगा। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कोटा यथावत रखा गया है या कुछ जगहों पर बढ़ाया जा सकता है। बीयर और अंग्रेजी शराब के कोटे में 7.5% की वृद्धि की गई है।
दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी से
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शराब की फुटकर दुकानों (देशी, अंग्रेजी, मॉडल शॉप, कंपोजिट शॉप और भांग) का आवंटन पूरी तरह ई-लॉटरी और ई-नीलामी के जरिए होगा। अंग्रेजी शराब दुकानों की लाइसेंस फीस में 7.5% और भांग दुकानों में 10% की बढ़ोतरी की गई है। बड़े शहरों (लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज आदि) में बियर, वाइन और कम अल्कोहल वाले पेय की दुकानों को बाहर लाइसेंस मिल सकेगा।
निर्यात नीति में बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अलग से तीन वर्षीय (2026-2029) आबकारी निर्यात नीति लागू की है।
• यूपी में बनी शराब को विदेशों में निर्यात करने के लिए ब्रांडिंग, लेबलिंग और फ्रैंचाइजी शुल्क्क में भारी कटौती या माफी दी गई है। बोतल भराई शुल्क न्यूनतम रखा गया है।इससे डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।
नई नीति के प्रमुख बिंदु
1 अप्रैल 2026 से देशी शराब प्रति बोतल 5-8 रुपये महंगी। 36% अल्कोहल वाली बोतल 165 से 173 रुपये। नया 100 एमएल ‘बच्चा’ पैक 50 रुपये में।लाइसेंस फीस में 7.5-10% बढ़ोतरी।शहरी क्षेत्रों में देशी शराब कोटा कम। दुकान आवंटन ई-लॉटरी से। राजस्व लक्ष्य 71,278 करोड़ रुपये। विदेश निर्यात को बढ़ावाावा, शुल्क में भारी छूट। नई आबकारी नीति से सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ शराब की बिक्री को नियंत्रित करना और निर्यात के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। शराब प्रेमियों को अब गहरी जेब ढीली करनी पड़ेगी, जबकि निर्यात से ‘मेड इन यूपी’ ब्रांड को वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद है।

