Ghooskhor Pandat Controversy: टीजर हटाया, मेकर्स ने रोका प्रमोशन; आदित्यनाथ के निर्देश पर कार्रवाई, मायावती ने लगाई बैन की मांग, इंस्पेक्टर बने वादी

Ghooskhor Pandat Controversy: मनोज बाजपेयी अभिनीत और नीरज पांडेय निर्देशित नेटफ्लिक्स वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही भारी विवादों में घिर गई है। सीरीज के टाइटल को ब्राह्मण समाज का अपमान बताते हुए उत्तर प्रदेश में कड़ा विरोध हो रहा है। CM योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में निर्देशक और टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई, जिसमें थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह खुद वादी बन गए है । विवाद बढ़ने पर मेकर्स ने टीजर और प्रमोशनल सामग्री हटा ली है, जबकि BSP सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार से सीरीज पर तुरंत बैन लगाने की मांग की है।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह कौन हैं?
हजरतगंज थाने में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह (उम्र करीब 46 साल) ने समाज में बढ़ते आक्रोश और अपमानजनक शब्दावली का संज्ञान लेते हुए खुद FIR दर्ज कराई गई। 2001 बैच के सब-इंस्पेक्टर विक्रम सिंह मैनपुरी से लखनऊ ट्रांसफर हुए थे। वे साइबर सेल, क्राइम ब्रांच (वाराणसी-झांसी) और अयोध्या में एसओ रह चुके हैं। मानवीय कार्यों के लिए मशहूर विक्रम सिंह ने कृष्णानगर थाने में एक वृद्धा का अंतिम संस्कार खुद कराया और बच्चों में पुलिस का डर दूर करने के लिए विशेष पहल की। दिसंबर 2025 में डीजीपी ने उन्हें बेहतर पुलिसिंग के लिए सम्मानित किया था।FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (नफरत फैलाना), 299 (धार्मिक-जातिगत भावनाएं आहत करना), 352-353 (सार्वजनिक शांति भंग) और IT एक्ट की धारा 66 शामिल हैं। आरोप है कि टाइटल एक विशेष समुदाय को अपमानित करता है और जातिगत विद्वेष पैदा करता है।मायावती की एंट्री, राजनीतिक रंग
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने विवाद में कूदते हुए इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया। एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने कहा, “पंडित को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में अपमान किया जा रहा है, इसको लेकर ब्राह्मण समाज में रोष है। BSP इसकी निंदा करती है और केंद्र सरकार से जातिसूचक फिल्म पर बैन की मांग करती है।” राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण वोट साधने की कोशिश बता रहे हैं, क्योंकि 2007 में मायावती ने इसी समीकरण से सत्ता हासिल की थी।

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मेकर्स की सफाई और बैकफुट
विवाद बढ़ने पर नेटफ्लिक्स ने टीजर हटा लिया और प्रमोशन रोक दिया। डायरेक्टर नीरज पांडेय ने बयान जारी कर कहा, “पूरी सीरीज देखे बिना जज न करें।” ब्राह्मण संगठनों ने प्रदर्शन किए, संतों ने बैन की मांग की और मामला संसद तक गूंजा। लखनऊ पुलिस ने जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत कार्रवाई की बात कही।विवाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक सद्भाव की बहस छेड़ चुका है। जांच जारी है और सीरीज की रिलीज पर संशय बरकरार है।

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