पुलिस के अनुसार, हादसा 5 फरवरी की देर रात हुआ। कमल की बाइक सड़क किनारे बने पानी से भरे गड्ढे में गिर गई और वह उसमें फंस गया। गंभीर चोटों और रात भर तड़पने के कारण उसकी मौत हो गई। सुबह करीब 8:03 बजे जनकपुरी थाने को सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला। परिजनों का आरोप है कि कमल के लापता होने के बाद वे पूरी रात कई थानों के चक्कर काटते रहे और मदद मांगते रहे, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुबह पुलिस के फोन से हादसे का पता चला।
यह घटना नोएडा के सेक्टर-150 में हाल ही में हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की याद ताजा कर दी है, जहां भी खुले गड्ढे में गिरने से जान गई थी। उस मामले में यूपी सरकार ने अधिकारियों पर कार्रवाई की थी। जनकपुरी की इस घटना से इलाके में गुस्सा है – लोग बता रहे हैं कि यह गड्ढा काफी दिनों से खुला पड़ा था और कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी नहीं थी।
दिल्ली सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा, “यह दर्दनाक घटना है। मैंने जल बोर्ड के काम की सभी सावधानियों की जांच के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। अगर कोई लापरवाही या कमी पाई गई तो ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
इधर सियासी बवाल भी शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सौरभ भारद्वाज ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “नोएडा की घटना से कुछ नहीं सीखा। सड़क पर गहरा गड्ढा, मासूम बाइक सवार गिरा, रात भर तड़पता रहा और मर गया। बस रोज झूठ बोला जाता है।” भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की सड़कों पर गड्ढों की समस्या लगातार जानलेवा बन रही है, खासकर बाइक सवारों के लिए। नागरिकों से अपील है कि रात में सावधानी बरतें और ऐसे गड्ढों की शिकायत तुरंत संबंधित विभाग या हेल्पलाइन (1916 – DJB, या 112) पर करें।
यह घटना शहर की सड़क सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठाती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

