पुलिस के अनुसार, तीनों बहनों ने बारी-बारी से बालकनी की स्लाइडिंग खिड़की से छलांग लगा दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर, पसलियों और पैरों में फ्रैक्चर मिले हैं, साथ ही आंतरिक अंगों के फटने से मौत की पुष्टि हो गई। किसी तरह की मारपीट, जबरदस्ती या पुरानी चोटों के निशान नहीं पाए गए। ट्रांस हिंडन जोन के डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि सीन रीक्रिएशन से स्पष्ट हुआ कि खिड़की से एक समय में केवल एक व्यक्ति ही बाहर निकल सकता था, जिससे बारी-बारी कूदने की बात साबित हो रही है। कमरा अंदर से बंद था और संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले है।
जांच में कमरे से एक डायरी, मोबाइल फोन और परिवार की तस्वीरें मिली हैं। सुसाइड नोट में बच्चियों ने मानसिक तनाव का जिक्र किया है – “मार खाने से बेहतर मर जाना है”, शादी का डर और कोरियन कल्चर से गहरा लगाव। पुलिस का कहना है कि कोविड के दौरान तीनों कोरियन मूवी, म्यूजिक और वेब सीरीज से इतना प्रभावित हुईं कि खुद को कोरियन मानने लगीं। पिता चेतन कुमार द्वारा मोबाइल छीने जाने और बेचे जाने से विवाद इतना बढ़ गया की मामला आत्महत्या तक पहुंच गया। परिवार पर शेयर ट्रेडिंग में दो करोड़ का कर्ज भी बताया जा रहा है। पिता से पूछताछ जारी है और बेचे गए मोबाइलों की तलाश की जा रही है।
इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने गंभीर संज्ञान लिया है। उन्होंने सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखकर क्लास 5 तक के बच्चों को वॉट्सऐप या मोबाइल पर होमवर्क/असाइनमेंट न देने के निर्देश जारी किए। आयोग का कहना है कि कोरोना काल के बाद भी यह प्रथा जारी रहने से बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ रही है, जो खतरनाक है। शैक्षणिक कार्य स्कूल में ही कराए जाएं और बच्चों को डिजिटल लत से बचाया जाए।
राजनीतिक स्तर पर भी हलचल है। गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने संसद में खतरनाक ऑनलाइन गेम्स और टास्क-बेस्ड ऐप्स पर बैन की मांग उठाने का ऐलान कर दिया है। वे डिजिटल सेफ्टी प्रोटोकॉल की भी वकालत कर रहे हैं। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना जताई और पैरेंट्स की लापरवाही पर सवाल भी उठाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है। बच्चों को मोबाइल की बजाय किताब-कॉपी और क्लासरूम की आदत डालनी होगी। अभिनेता सोनू सूद ने भी दुख जताते हुए पैरेंट्स से अपील की कि बच्चों को डांटने की बजाय समझाएं।
पुलिस जांच जारी है और जनता से अपील है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें तथा मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समय पर काउंसलिंग जरूरी है।

