Missing persons in Delhi a cause for concern: 2026 के पहले 15 दिनों में 807 मामले दर्ज, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

Missing persons in Delhi a cause for concern: राजधानी दिल्ली में लापता लोगों के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। दिल्ली पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती 15 दिनों (1 से 15 जनवरी) में कुल 807 लोग लापता होने की शिकायतें दर्ज की गईं, जो औसतन प्रतिदिन 54 मामले बनते हैं। इनमें महिलाओं और लड़कियों की संख्या सबसे अधिक है – कुल 509 मामले (लगभग 63 प्रतिशत), जबकि पुरुषों के 298 मामले सामने आए।

इन आंकड़ों में नाबालिगों की संख्या भी चौंकाने वाली है। कुल 191 बच्चे और किशोर लापता हुए, जिनमें 146 लड़कियां और 45 लड़के शामिल हैं। पुलिस ने अब तक इनमें से 235 लोगों को ढूंढ निकाला है, लेकिन 572 लोग अभी भी लापता हैं।

पुलिस का पक्ष: कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन आंकड़ों में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है। जनवरी 2026 में कुल 1,777 लापता लोगों के मामले दर्ज किए गए, जो दिल्ली में मासिक औसत लगभग 2,000 मामलों के करीब है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ज्यादातर मामले घरेलू विवाद, नौकरी की तलाश या स्वेच्छा से घर छोड़ने से जुड़े होते हैं, न कि किसी संगठित गिरोह की साजिश से। सोशल मीडिया पर फैली गैंग की अफवाहों को पुलिस ने खारिज किया है और ऐसी गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

ऑपरेशन मिलाप से उम्मीद की किरण
दिल्ली पुलिस की ‘ऑपरेशन मिलाप’ पहल के तहत लापता लोगों को ढूंढने के प्रयास तेज किए गए हैं। दक्षिण-पश्चिम जिले में जनवरी महीने में ही 75 लापता लोगों (जिनमें 28 बच्चे शामिल थे) को उनके परिवारों से मिलवाया गया। पुलिस AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन और अन्य तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही है, जिससे ट्रेसिंग रेट में सुधार हो रहा है।

पिछले वर्षों के आंकड़े
• 2025 में: कुल लगभग 24,500 लोग लापता हुए, जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल थीं।
• पिछले 10 वर्षों (2016-2025) में: 2.3 लाख से अधिक मामले दर्ज, जिनमें से करीब 52,000 अभी अनट्रेस्ड हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े दिल्ली की बढ़ती आबादी, प्रवासी मजदूरों और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का परिणाम स्वरूप हैं। पुलिस नागरिकों से अपील कर रही है कि लापता होने की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं और ZIPNET पोर्टल का उपयोग करें।

हालांकि पुलिस आश्वासन दे रही है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज में चिंता का विषय बनी हुई है।

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