इन आंकड़ों में नाबालिगों की संख्या भी चौंकाने वाली है। कुल 191 बच्चे और किशोर लापता हुए, जिनमें 146 लड़कियां और 45 लड़के शामिल हैं। पुलिस ने अब तक इनमें से 235 लोगों को ढूंढ निकाला है, लेकिन 572 लोग अभी भी लापता हैं।
पुलिस का पक्ष: कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन आंकड़ों में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है। जनवरी 2026 में कुल 1,777 लापता लोगों के मामले दर्ज किए गए, जो दिल्ली में मासिक औसत लगभग 2,000 मामलों के करीब है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ज्यादातर मामले घरेलू विवाद, नौकरी की तलाश या स्वेच्छा से घर छोड़ने से जुड़े होते हैं, न कि किसी संगठित गिरोह की साजिश से। सोशल मीडिया पर फैली गैंग की अफवाहों को पुलिस ने खारिज किया है और ऐसी गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
ऑपरेशन मिलाप से उम्मीद की किरण
दिल्ली पुलिस की ‘ऑपरेशन मिलाप’ पहल के तहत लापता लोगों को ढूंढने के प्रयास तेज किए गए हैं। दक्षिण-पश्चिम जिले में जनवरी महीने में ही 75 लापता लोगों (जिनमें 28 बच्चे शामिल थे) को उनके परिवारों से मिलवाया गया। पुलिस AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन और अन्य तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही है, जिससे ट्रेसिंग रेट में सुधार हो रहा है।
पिछले वर्षों के आंकड़े
• 2025 में: कुल लगभग 24,500 लोग लापता हुए, जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल थीं।
• पिछले 10 वर्षों (2016-2025) में: 2.3 लाख से अधिक मामले दर्ज, जिनमें से करीब 52,000 अभी अनट्रेस्ड हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े दिल्ली की बढ़ती आबादी, प्रवासी मजदूरों और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का परिणाम स्वरूप हैं। पुलिस नागरिकों से अपील कर रही है कि लापता होने की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं और ZIPNET पोर्टल का उपयोग करें।
हालांकि पुलिस आश्वासन दे रही है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज में चिंता का विषय बनी हुई है।

