“Universities are temples of knowledge”: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एडहॉक शिक्षकों को केवल नियमित नियुक्ति से ही बदला जा सकता है

“Universities are temples of knowledge”: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के मंदिर हैं और यहां एडहॉक या कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नियुक्त सहायक प्रोफेसरों को बार-बार हटाकर नए अस्थायी शिक्षक लगाना शिक्षा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडहॉक कर्मचारियों को केवल नियमित भर्ती प्रक्रिया से चयनित स्थायी उम्मीदवार से ही बदला जा सकता है, न कि दूसरे एडहॉक या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी से।

जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम की सिंगल बेंच ने 31 जनवरी को यह आदेश दिया, जो आज सामने आया है। कोर्ट ने कहा, “विश्वविद्यालय ज्ञान के मंदिर हैं, जहां निरंतरता, शैक्षणिक स्थिरता और शिक्षक-विद्यार्थी के बीच लगातार संपर्क उच्च शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।” कोर्ट ने एडहॉक नियुक्तियों के बार-बार आने-जाने को शिक्षा प्रक्रिया में बाधा बताया और इसे छात्रों के हितों के खिलाफ करार दिया।

मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता पी नागराजू रायलसीमा यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट के सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने 2006 से कॉन्ट्रैक्ट आधार पर पढ़ाना शुरू किया और करीब 11 साल से लगातार सेवा दे रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने 2017 में एक सर्कुलर जारी कर नए अस्थायी शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की, जिसके तहत नागराजू को हटाने की कोशिश की गई।

नागराजू ने इसे मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 16 (नौकरी में समान अवसर) और 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि स्थायी प्रकृति के काम के लिए एक अस्थायी कर्मचारी को दूसरे अस्थायी कर्मचारी से नहीं बदला जा सकता।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि जब तक नियमित प्रक्रिया से स्थायी उम्मीदवार की नियुक्ति नहीं हो जाती और पर्याप्त छात्र नामांकन बना रहता है, तब तक नागराजू अपनी पोस्ट पर बने रह सकते हैं।

• शिक्षा राज्य की सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है जो राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा है (अनुच्छेद 21A – शिक्षा का अधिकार)।
• एडहॉक शिक्षक, जो नियमित फैकल्टी जैसे ही काम करते हैं, उन्हें डिस्पोजेबल रिसोर्स की तरह नहीं माना जा सकता।
• एक एडहॉक को दूसरे एडहॉक से बदलना कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम का दुरुपयोग है और यह स्थायी भर्ती के उद्देश्य को विफल करता है।
• अस्थायी नियुक्तियां केवल अंतरिम व्यवस्था हो सकती हैं; स्थायी जरूरत वाले पदों पर बार-बार अस्थायी नियुक्ति नहीं की जा सकती।
• इससे न केवल शिक्षकों की गरिमा और आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता भी कमजोर पड़ती है।

कोर्ट ने राज्य और उसके संस्थानों को छात्रों के स्थिर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार और निष्पक्ष रोजगार प्रथाओं के बीच संतुलन बनाने का निर्देश दिया।

प्रभाव और विशेषज्ञों की राय
यह फैसला देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से एडहॉक/कॉन्ट्रैक्ट आधार पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नियमित भर्ती प्रक्रिया को तेज करने का दबाव बढ़ेगा और शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता आएगी। हालांकि, कुछ विश्वविद्यालय प्रशासन इसे कार्यान्वयन में चुनौती बता रहे हैं।

मामला शिक्षा के अधिकार और श्रम गरिमा से जुड़ा होने के कारण व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। अन्य राज्यों के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी इसी तरह के मामले लंबित हैं, जिससे यह फैसला मिसाल बन सकता है।

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