Cloud AI challenges the SaaS model: भारतीय आईटी इंडस्ट्री में मंगलवार को भूचाल सा आ गया जब एंथ्रोपिक के क्लॉड एआई के नए अपग्रेड्स ने SaaS (सॉफ्टवेयर ऐज अ सर्विस) कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर सीधा हमला बोल दिया। इसके चलते दुनियाभर में आईटी और SaaS स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई, जिसमें भारत की दिग्गज कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस और ग्लोबल स्तर पर सेल्सफोर्स भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पर छंटनी की चर्चाएं तेज हो गई हैं और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय आईटी सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियां जा सकती हैं।
क्लॉड एआई का नया अपग्रेड क्यों बना ट्रिगर?
एंथ्रोपिक ने क्लॉड एआई के लिए कई नए प्लग-इन्स जारी किए हैं, जो लीगल रिसर्च, ड्राफ्टिंग, सेल्स, मार्केटिंग, डेटा एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में काम कर सकते हैं। पहले इन कार्यों के लिए कंपनियां महंगे SaaS टूल्स पर निर्भर रहती थीं, लेकिन अब एआई इन कामों को तेजी और सस्ते में करने में सक्षम हो गया है। इससे SaaS बिजनेस की अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है।
जानी-मानी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन ने 3 फरवरी को जारी रिपोर्ट में इसे स्पष्ट रूप से वजह बताया। रिपोर्ट का शीर्षक था- “Software Collapse Broadens with Nowhere to Hide as AI Rate-of-Change Is Extrapolated…”। इसमें कहा गया कि एंथ्रोपिक के प्लग-इन्स रिलीज ने सॉफ्टवेयर सेक्टर में बिकवाली को और तेज कर दिया है।
सैन फ्रांसिस्को की वेंचर कैपिटलिस्ट तालिया गोल्डबर्ग ने एक्स पर लिखा, “SaaS इंडेक्स पिछले साल की तुलना में 32 फीसदी नीचे है, जबकि ज्यादातर कंपनियां अपने टारगेट पूरा कर रही हैं और मार्केट 15 फीसदी ऊपर है। एआई एजेंट्स के SaaS को खाने का डर बेहद ज्यादा है।”
जोहो के चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने भी एक्स पर पोस्ट कर चेतावनी दी: “एआई-सहायता प्राप्त कोडिंग के युग में स्टॉक मार्केट SaaS कंपनियों के भविष्य को लेकर बेहद नकारात्मक हो रहा है।” उन्होंने कहा कि पहले से ही SaaS इंडस्ट्री में सेल्स-मार्केटिंग पर ज्यादा खर्च और इंजीनियरिंग पर कम निवेश की कमजोरी थी, जिसे अब एआई उजागर कर रहा है।
स्टॉक्स में गिरावट, छंटनी की आशंका
मंगलवार को अमेरिका से लेकर भारत तक आईटी स्टॉक्स में व्यापक गिरावट दर्ज की गई। भारतीय बाजार में इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी नुकसान हुआ। ग्लोबल स्तर पर भी सेल्सफोर्स और अन्य SaaS कंपनियां प्रभावित हो रही है।
इस गिरावट के साथ ही सोशल मीडिया पर छंटनी की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। एक एआई एनालिस्ट ने एक्स पर लिखा, “SaaS कंपनियां स्टॉक बेस्ड कंपंसेशन कम करने के लिए कर्मचारियों को निकालेंगी। इस साल 25 फीसदी तक कटौती की उम्मीद है।” एक भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपर ने कहा, “स्टॉक निवेशक के तौर पर मैं आईटी स्टॉक्स से बाहर निकल रहा हूं। डेवलपर के तौर पर यह बदलाव डराता है। छंटनी अभी खत्म नहीं हुई, और आने वाली है।”
पहले से ही 2025 में टीसीएस में करीब 30,000 छंटनी के बाद भारतीय बिग टेक कंपनियों ने पूरे साल में सिर्फ 17 नई नौकरियां जोड़ी थीं। हायरिंग लगभग ठप है और जाने वाले कर्मचारियों की जगह नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्लॉड जैसे एआई टूल्स का असर आगे और गहरा सकता है।
आगे की स्थिति
आईटी इंडस्ट्री पहले से ही एआई ऑटोमेशन और आर्थिक मंदी के दबाव में है। क्लॉड एआई का यह अपग्रेड एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है, जो पारंपरिक SaaS और सर्विसेज मॉडल को चुनौती दे रहा है। इंफोसिस और टीसीएस जैसी कंपनियां अभी तक छंटनी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मार्केट सेंटिमेंट और सोशल मीडिया चैटर से साफ है कि सेक्टर में तूफान आने वाला है।

