Ethnic violence continues in Manipur: मणिपुर में पिछले साल लगाए गए राष्ट्रपति शासन को आज हटा लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला लगभग एक वर्ष बाद लिया गया है।
पृष्ठभूमि
राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी 2025 को लगाया गया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने जातीय हिंसा के बीच इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य का प्रत्यक्ष नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और मणिपुर विधानसभा को निलंबित (सस्पेंडेड एनिमेशन) कर दिया गया। राज्य में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच चले लंबे संघर्ष के कारण यह कदम उठाया गया था।
इसके बाद राष्ट्रपति शासन को कई बार बढ़ाया गया—जुलाई-अगस्त 2025 में संसद ने इसे फरवरी 2026 तक के लिए आगे बढ़ाया था। एक वर्ष पूरा होने से ठीक पहले इसकी समाप्ति से राज्य में चुनी हुई सरकार बहाल करने का रास्ता साफ हो सकता है।
हाल की गतिविधियां
हाल के दिनों में खबरें आई थीं कि भाजपा ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना है, जो अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। अलग-अलग समुदायों के विधायकों से बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया है। राष्ट्रपति शासन हटने से अब नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
वर्तमान स्थिति
राज्य में अभी भी जातीय तनाव बरकरार है और शांति पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। केंद्र सरकार पर लंबे समय से दबाव था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था जल्द बहाल की जाए, क्योंकि संविधान के अनुसार एक वर्ष बाद विधानसभा भंग करने या चुनाव कराने की बाध्यता आ जाती है। इस फैसले को राज्य में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

