Plunder and plunder” illegal mining in the Aravallis: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर कड़ी फटकार लगाई, हरियाणा के मुख्य सचिव से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा

“Plunder and plunder” illegal mining in the Aravallis: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के चरखी दादरी जिले के पिचोपा कलां गांव में अवैध पत्थर खनन को पर्यावरण की “लूट और प्लंडर” करार देते हुए गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जाहिर की और पूरी खनन साइट को सील करने का आदेश दिया है।

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने अंतरिम आदेश में कहा कि यह मामला पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक प्रभाव रखता है। याचिका गांव वासियों और धर्मपाल स्टोन क्रशर के ऑपरेटर ने दायर की थी, जिन्होंने निजी लीजधारक जय दादा डोहला स्टोन माइंस पर स्वीकृत 11 हेक्टेयर क्षेत्र से कहीं अधिक अवैध खनन का आरोप लगाया। याचिका में संलग्न तस्वीरों से पता चला कि पहाड़ियां पूरी तरह गायब हो गई हैं और उनकी जगह गहरे गड्ढे रह गए हैं।

कोर्ट ने अधिवक्ता कंवल गोयल को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया था, जिनकी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि खनन स्वीकृत क्षेत्र से बहुत आगे तक फैला हुआ है। एक केंद्रीय गड्ढा बारिश के पानी से भरा हुआ है, जिसकी गहराई 47 मीटर तक दिखाई दी। क्षेत्र को राजस्व रिकॉर्ड में “गैर मुमकिन पहाड़” दर्ज किया गया है, जो अरावली का हिस्सा है। पर्यावरण मंजूरी की शर्तों—like सालाना 600 पेड़ लगाना, ग्रीन बेल्ट विकसित करना और भूजल स्तर से तीन मीटर ऊपर तक ही खनन—का लगभग कोई पालन नहीं हुआ।

बेंच ने कहा, “नग्न आंखों से जो दिख रहा है, वह न केवल परेशान करने वाला है बल्कि हैरान करने वाला भी। प्रथम दृष्टया यह पर्यावरण मंजूरी और खनन योजना के उल्लंघन का मामला लगता है, जो प्राकृतिक संसाधनों की लूट और प्लंडर है।” कोर्ट ने राज्य अधिकारियों की लापरवाही पर टिप्पणी की और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया। एक सड़क जो 2012-13 में बनी थी, वह भी पूरी तरह गायब हो गई।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश:
• हरियाणा के मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगकर पर्यावरणीय लूट से निपटने की योजना और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा।
• केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय को उपाय सुझाने के लिए शामिल किया।
• हरियाणा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर से 2016 से सालाना सैटेलाइट इमेजरी मांगी।
• चरखी दादरी के डिप्टी कमिश्नर को 48 घंटे में पूरी साइट सील करने और प्रक्रिया का वीडियोग्राफी करने का आदेश।
• 11 दिसंबर 2025 के माइन क्लोजर ऑर्डर को “कवर-अप” करार दिया।

मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने हरियाणा की प्रतिक्रिया से असंतुष्ट होने पर मामले को स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की संभावना खुली रखी। यह एक विकासशील खबर है, और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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