Noida Sector-150 accident: बिल्डर कर्मचारियों को जमानत, अथॉरिटी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं; परिवार बोले- एसआईटी जांच सिर्फ खानापूर्ति, मामला दबाया जा रहा

Noida Sector-150 accident: सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की निर्माणाधीन बिल्डर प्रोजेक्ट के पानी भरे बेसमेंट में डूबकर मौत के मामले में गिरफ्तार लोटस ग्रीन कंपनी के दो कर्मचारियों रवि बंसल और सचिन करनवाल को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने जमानत पर कई सख्त शर्तें लगाई हैं, लेकिन पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों में गुस्सा है कि नोएडा अथॉरिटी के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि गठित एसआईटी ने सिर्फ खानापूर्ति की है और मामला रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है।

कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि के निजी बंधपत्र पर जमानत दी। शर्तें शामिल हैं: जांच में पूरा सहयोग करना, कोर्ट की अनुमति बिना विदेश नहीं जाना, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करना और विदेश यात्रा के लिए पूर्व अनुमति लेना। बचाव पक्ष के वकील मनोज भाटी ने दावा किया कि आरोपी निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया। अभियोजन पक्ष ने भी अपराध को जमानती प्रकृति का बताया।

हादसा 16 जनवरी की रात हुआ था, जब युवराज मेहता (लोटस ग्रीन प्रोजेक्ट के पास) कार समेत पानी से भरे बेसमेंट में गिरकर डूब गए थे। कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं था। पीड़ित पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर पुलिस ने एमजेड विजटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार सहित तीन लोग नामजद हैं।

परिवार और जनता में आक्रोश
युवराज के परिवार ने जमानत पर निराशा जताई और कहा कि असली जिम्मेदार नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी हैं, जिन्होंने निर्माण साइटों की मॉनिटरिंग नहीं की। हादसे के बाद सीईओ लोकेश एम और कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन वह सिर्फ औपचारिकता थी। “बिल्डरों को बचाने के लिए अधिकारियों पर हाथ नहीं डाला जा रहा। मामला दबाया जा रहा है”, पीड़ित पिता ने कहा।

आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन किए। उनका कहना है कि सेक्टर-22D में भी इसी तरह का पानी भरा गड्ढा पकड़ा गया और वहां मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन बड़े अधिकारियों को क्लीन चिट मिल रही है। अथॉरिटी ने सभी प्रोजेक्ट्स पर सेफ्टी ऑडिट का आदेश दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो रहा।

प्रशासन का पक्ष
नोएडा अथॉरिटी के एक अधिकारी ने कहा कि एसआईटी जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। सभी निर्माण साइटों पर चेकिंग जारी है। हालांकि, सीईओ या अधिकारियों के सस्पेंशन के बाद और कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

यह मामला नोएडा में बिल्डरों और अथॉरिटी की लापरवाही को उजागर कर रहा है। पीड़ित परिवार हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।

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