Union Budget 2026: 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट 2026 पेश करेंगी। क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) सेक्टर में हलचल तेज है। निवेशक, ट्रेडर्स और इंडस्ट्री बॉडीज को उम्मीद है कि सरकार मौजूदा सख्त टैक्स सिस्टम में राहत देगी, ताकि भारत ग्लोबल क्रिप्टो हब बन सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैक्स नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम और ज्यादा विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो जाएगा।
मौजूदा टैक्स नियम और दिक्कतें फिलहाल, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 115BBH के तहत क्रिप्टो ट्रांसफर से होने वाले मुनाफे पर 30% फ्लैट टैक्स लगता है (सरचार्ज और सेस सहित प्रभावी दर 31-37% तक)। इसके अलावा, धारा 194S के तहत 1% TDS कटता है, अगर एक वित्त वर्ष में ट्रांजैक्शन 10,000 रुपये (कुछ मामलों में 50,000) से ज्यादा हो। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि क्रिप्टो से होने वाले नुकसान को अन्य VDAs के मुनाफे से सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता और इसे आगे कैरी फॉरवर्ड भी नहीं किया जा सकता। इससे निवेशकों को असली आर्थिक नुकसान के बावजूद पूरा टैक्स चुकाना पड़ता है।
इंडस्ट्री का कहना है कि 1% TDS की वजह से लिक्विडिटी कम हुई है, स्प्रेड (खरीद-बिक्री भाव में अंतर) बढ़ा है और ज्यादातर ट्रेडिंग विदेशी एक्सचेंज जैसे बिनांस, कुकोइन पर चली गई है। भारत में रजिस्टर्ड एक्सचेंज जैसे वजीरएक्स, कॉइनडीसीएक्स का वॉल्यूम पिछले दो साल में 90% तक गिर चुका है।
इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स की प्रमुख मांगें
• TDS में कटौती: 1% TDS को घटाकर 0.01% या 0.1% करने की मांग। कुछ एक्सपर्ट्स इसे पूरी तरह हटाने या सिर्फ बड़े ट्रांजैक्शन (50 लाख से ऊपर) पर लागू करने की सिफारिश कर रहे हैं।
• लॉस सेट-ऑफ और कैरी फॉरवर्ड: एक ही कैटेगरी (VDA) में नुकसान को मुनाफे से एडजस्ट करने और 4-8 साल तक कैरी फॉरवर्ड की अनुमति।
• टैक्स स्लैब में शामिल: 30% फ्लैट की जगह कैपिटल गेंस टैक्स स्लैब (शॉर्ट टर्म 15%, लॉन्ग टर्म इंडेक्सेशन के साथ) लागू करने की मांग।
• क्लैरिटी और रेगुलेशन: क्रिप्टो को सेबी या RBI के तहत रेगुलेटेड एसेट क्लास बनाने की मांग, ताकि बैंकिंग और KYC आसान हो।
भारत क्रिप्टो काउंसिल (BACC) और इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने प्री-बजट मीमोरेंडम में ये सुझाव दिए हैं। पॉलीगॉन लैब्स के ग्लोबल हेड ऐश्वर्य गुप्ता ने कहा, “यूएई, सिंगापुर, दुबई में क्रिप्टो गेंस पर 0% टैक्स है, जबकि पुर्तगाल, जर्मनी में लॉन्ग टर्म होल्डिंग पर कोई टैक्स नहीं। भारत का 30% + 1% TDS दुनिया के सबसे सख्त नियमों में है।”
ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट की रिकवरी के बीच दबाव
हाल ही में बिटकॉइन 90,000 डॉलर के पार पहुंचा है और ग्लोबल मार्केट कैप 3 ट्रिलियन डॉलर के करीब है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के क्रिप्टो-फ्रेंडली रुख और ETF अप्रूवल से निवेश बढ़ा है। भारत में भी 10-15 करोड़ लोग क्रिप्टो होल्ड करते हैं, लेकिन सख्त नियमों से युवा निवेशक विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर जा रहे हैं, जिससे सरकार को टैक्स राजस्व का नुकसान हो रहा है।
टैक्स एक्सपर्ट सीए मोहित गुप्ता (PNAM & Co) ने कहा, “बजट में TDS दर कम होना सबसे जरूरी है। इससे घरेलू एक्सचेंज मजबूत होंगे और टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा।” वहीं, सीए सुरेश सुरना ने लॉस सेट-ऑफ को “निवेशकों के लिए न्यायपूर्ण” बताया।
सरकार ने अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक डिजिटल एसेट्स पर फोकस रहेगा। यदि राहत नहीं मिली, तो इंडस्ट्री निराश हो सकती है। कल बजट स्पीच में क्रिप्टो का जिक्र सभी की नजरों पर होगा।

