नोएडा पुलिस को नही लगी भनक, रवि काना जेल से हुआ रिहा, सामने आई जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही

Noida News: गौतमबुद्ध नगर में अलग अलग मामलों में जेल भेजे गए रविंद्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ के मामले में जेल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। रवि काना जेल से रिहा हो गया और नोएडा पुलिस को भनक तक नहीं लगी। इसके बाद पता चला कि लापरवाही के चलते रवि काना जेल से बाहर आया है। चलिए बताते हैं आखिर रवि काना कैसे बाहर आ गया। दरअसल, जेल अधीक्षक बांदा की लापरवाही से रवि काना की गैरकानूनी तरीके से रिहाई हो गई। नोएडा के थाना सेक्टर-63 के एक गंभीर मामले में रवि काना के खिलाफ भारी धाराओं में मुकदमा दर्ज है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्ध नगर ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजने का स्पष्ट आदेश दिया था। बावजूद इसके 29 जनवरी 2026 को रवि काना बांदा जेल से रिहा कर दिया गया।

स्क्रैप माफिया रवि काना बी-वारंट के बाद भी रिहा
बता दें कि गौतमबुद्ध नगर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्क्रैप माफिया रवि काना को बी-वारंट होने पर भी जेल से रिहा करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है।

जेल अधीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण
इस मामले में कोर्ट ने बांदा जिला कारागार के जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने इस मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए जेल अधीक्षक से 6 फरवरी तक स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही रवि काना के खिलाफ दोबारा गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। अदालत ने पुलिस को आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए है।यह मामला साल 2026 में थाना सेक्टर-63 में एक केस में दर्ज धारा-308(5), 351(2), 3(5) भारतीय न्याय संहिता से जुड़ा है। इसी मामले में कोर्ट ने आरोपी रविंद्र सिंह उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना निवासी दादूपुर, थाना दनकौर की अनधिकृत रिहाई पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, आरोपी रवि नागर उर्फ रवि काना पहले से ही किसी अन्य मामले में बांदा जिला कारागार में बंद था। नोएडा पुलिस ने उसे सेक्टर-63 के मामले में अदालत में पेश करने के लिए बी-वारंट जारी कराया था। बी-वारंट का अर्थ है कि आरोपी को हर हाल में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। 29 जनवरी 2026 को आरोपी को बी-वारंट के माध्यम से अदालत में पेश किया गया था। उसी दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई हुई। लेकिन जेल अधीक्षक ने पुलिस गार्ड न मिलने का हवाला देकर आरोपी को शाम 6ः39 बजे बांदा जिला करागार से रिहा कर दिया। जेल ने सूचित किया कि अन्य सभी वारंटों पर रिहाई हो चुकी थी और नया वारंट, पेशी तिथि न मिलने से निरूद्ध रखना संभव न था। जबकि नोएडा के इस मामले में उसके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही चल रही थी। मामले की गंभीरता बताते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जेल प्रशासन को आरोपी के बी-वारंट और वीसी सुनवाई की पूरी जानकारी थी।

नही था कोर्ट से कोई स्पष्ट रिहाई का आदेश
इसके बावजूद उसे किन परिस्थितियों और किस आधार पर रिहा किया गया, यह समझ से परे है। कोर्ट के अनुसार, जब आरोपी की रिमांड की कार्यवाही चल रही थी और कोर्ट से कोई स्पष्ट रिहाई आदेश प्राप्त नहीं हुआ था, तब जेल से उसे छोड़ना एक गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा सकती है। जेल अधीक्षक को 6 फरवरी 2026 तक सप्ताह भर में लिखित स्पष्टीकरण सह आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

 

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