India-EU free trade deal deals major blow to Bangladesh: गारमेंट एक्सपोर्ट पर मंडराया संकट, विशेषज्ञों ने दी गंभीर चेतावनी

India-EU free trade deal deals major blow to Bangladesh: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 27 जनवरी को हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर पर गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यह समझौता 2027 से लागू होने की उम्मीद है, जिसके बाद भारतीय कपड़ा उत्पादों को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल जाएगा। इससे बांग्लादेश की वर्षों पुरानी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त खत्म हो सकती है, क्योंकि वह जल्द ही सबसे कम विकसित देश (LDC) की श्रेणी से बाहर हो जाएगा और उसे 12-12.5% टैरिफ चुकाना पड़ेगा।

बांग्लादेश को 1975 से LDC सुविधा के तहत EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिला हुआ है, जिसकी वजह से वह चीन के बाद EU को कपड़ा निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया। कुछ कैटेगरी जैसे डेनिम, ट्राउजर और टी-शर्ट में वह चीन से आगे है। वित्त वर्ष 2024-25 में EU को उसके कुल गारमेंट एक्सपोर्ट का 50% से अधिक (19.71 अरब डॉलर) हिस्सा था। लेकिन नवंबर 2026 से LDC ग्रेजुएशन के बाद यह सुविधा केवल 3 साल (2029 तक) के लिए बढ़ाई गई है। इसके बाद बिना नए समझौते (जैसे GSP+ या द्विपक्षीय FTA) के बांग्लादेश को भारी टैरिफ देना पड़ेगा, जबकि भारत और वियतनाम जैसे देश ड्यूटी-फ्री रहेंगे।

ढाका में विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के सीनियर फेलो मुस्तफिजुर रहमान ने कहा, “भारत को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलते ही बांग्लादेश EU मार्केट में कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।” BRAC EPL की रिसर्च में कहा गया कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा से एक्सपोर्ट मार्जिन पर स्थायी असर पड़ेगा। BGMEA के डायरेक्टर फैसल समद ने माना कि असर धीरे-धीरे दिखेगा, लेकिन भारत की मजबूती (कच्चा माल, मानव संसाधन और सरकारी सब्सिडी) से चुनौती बढ़ेगी।

निटवियर फैक्ट्री प्लमी फैशन्स के एमडी फजलुल हक ने चेतावनी दी कि खरीदार कम कीमत मांगेंगे और ऑर्डर दूसरी जगह शिफ्ट हो सकते हैं। BTMA अध्यक्ष शौकत अजिज रसेल ने सरकार से टैक्स छूट और इंसेंटिव की मांग की, जबकि BKMEEA अध्यक्ष मोहम्मद हातेम ने EU के साथ टिकाऊ ट्रेड डील न होने को पॉलिसी फेल्योर बताया।

भारत-EU डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, जो दोनों पक्षों के लिए ऐतिहासिक है। लेकिन बांग्लादेश के लिए यह दोहरा झटका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ढाका को जल्द EU के साथ GSP+ या FTA पर फोकस करना होगा, वरना गारमेंट इंडस्ट्री (जो GDP का 16% और निर्यात का 84% योगदान देती है) पर गंभीर संकट आ सकता है। फिलहाल कोई नई प्रतिक्रिया या अपडेट सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाएं तेज हैं।

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