ईरान और पश्चिम में आर-पार की जंग: यूरोपीय संघ ने IRGC को ‘आतंकी संगठन’ घोषित किया, तेहरान ने दी बड़ी चेतावनी

ब्रसेल्स/तेहरान: मध्य पूर्व में तनाव के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को आधिकारिक तौर पर एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। गुरुवार (29 जनवरी 2026) को हुई यूरोपीय विदेश मंत्रियों की बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया। इस कदम के बाद IRGC अब अल-कायदा और ISIS जैसे संगठनों की श्रेणी में खड़ा हो गया है। ईरान ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक “बड़ी रणनीतिक गलती” बताया है और चेतावनी दी है कि इसके परिणाम यूरोपीय देशों को भुगतने होंगे।

EU के कड़े रुख की वजह: “जुल्म का हिसाब होगा”

यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख काजा कल्लास ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर जो हिंसक कार्रवाई की गई, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कल्लास ने सोशल मीडिया पर लिखा:

“दमन का जवाब देना जरूरी है। जो शासन अपने ही हजारों निर्दोष लोगों की हत्या करता है, वह अपने विनाश की ओर बढ़ रहा है। यदि आप आतंकवादियों जैसा व्यवहार करते हैं, तो आपके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाएगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान 6,000 से अधिक लोगों की मौत और मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन को इस फैसले का मुख्य आधार बनाया गया है। इसके साथ ही, ईरान द्वारा रूस को सैन्य मदद देने और क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के आरोपों ने भी आग में घी का काम किया।

ईरान का पलटवार: “यूरोप आग से खेल रहा है”

तेहरान ने EU के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और “अंधभक्ति” करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि जहाँ दुनिया युद्ध रोकने की कोशिश कर रही है, वहीं यूरोप “आग भड़काने” में व्यस्त है।

  • रणनीतिक भूल: अरागची ने इसे यूरोप की बड़ी रणनीतिक गलती बताते हुए कहा कि IRGC कोई आतंकी गुट नहीं, बल्कि ईरान की आधिकारिक सेना का हिस्सा है।

  • दोगुना मानक: ईरान ने आरोप लगाया कि यूरोप गाजा में हो रहे नरसंहार पर चुप है, लेकिन मानवाधिकारों के नाम पर ईरान को निशाना बना रहा है।

  • चेतावनी: ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस “उकसावे वाले फैसले” के परिणाम सीधे तौर पर यूरोपीय नीति निर्माताओं को भुगतने होंगे।

इस फैसले के क्या होंगे परिणाम?

IRGC को आतंकी सूची में डालने के बाद अब ईरान पर दबाव कई गुना बढ़ जाएगा:

  1. संपत्ति की जब्ती: यूरोपीय देशों में IRGC से जुड़ी संपत्तियों को फ्रीज (Freeze) किया जा सकेगा।

  2. कानूनी कार्रवाई: अब किसी व्यक्ति को IRGC का सदस्य होने या उसे फंड देने के आरोप में आसानी से गिरफ्तार किया जा सकेगा।

  3. आर्थिक झटका: IRGC का ईरान की अर्थव्यवस्था में बड़ा दखल है; इस बैन से ईरान के व्यापारिक हितों को गहरी चोट पहुंचेगी।

 ट्रंप और अमेरिका का बढ़ता दबाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि वह या तो परमाणु मुद्दे पर बातचीत की मेज पर आए या फिर सैन्य कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहे। फ्रांस और इटली, जो पहले इस बैन का विरोध कर रहे थे, उन्होंने भी अब अमेरिका और जर्मनी के सुर में सुर मिला लिया है। यूरोपीय संघ का यह फैसला न केवल कूटनीतिक है, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि अब पश्चिम ईरान के प्रति अपनी “सॉफ्ट पॉलिसी” को पूरी तरह खत्म कर चुका है। आने वाले दिनों में खाड़ी देशों और यूरोप के बीच सैन्य और आर्थिक संबंध और अधिक जटिल हो सकते हैं।

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