मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता को आरोपी हारून और उसके साथियों ने शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने के लालच देकर ठगा। जीरोधा ऐप के जरिए शेयर ट्रेडिंग के नाम पर शिकायतकर्ता से करीब 1.15 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के खाते से निकाले गए 7.55 लाख रुपये आरोपी के नाम पर खुले बैंक खाते में जमा हुए थे। इसके आधार पर मई 2025 में हारून को गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ में हारून ने खुलासा किया कि वह सह-आरोपी दीपक भट्ट के साथ मिलकर ऑनलाइन फ्रॉड का धंधा चलाता था और कमीशन के बदले आकर्षक रकम की पेशकश की जाती थी। आरोपी और उसके साथियों ने एक फर्म के नाम पर बैंक खाते खोलकर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम ट्रांसफर की थी।
कोर्ट ने 23 जनवरी 2026 को जारी आदेश में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपी के खिलाफ साइबर पोर्टल पर इसी बैंक खाते से जुड़े 28 अन्य मामले दर्ज हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि साइबर अपराधी अब परिष्कृत तरीकों से आम लोगों और संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में अपराधियों को निरुत्साहित करने के लिए सख्ती बरतनी होगी।
आरोपी के वकील ने दलील दी थी कि उनका मुवक्किल अन्य मामलों में जमानत पर है और उसे झूठा फंसाया गया है। वहीं, राज्य की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि हारून आदतन अपराधी है और जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या फिर ऐसे अपराध दोहरा सकता है।
हाईकोर्ट ने सभी दलीलों पर विचार कर जमानत अर्जी इस स्तर पर स्वीकार करने योग्य नहीं मानी। फिलहाल जांच जारी है और अन्य आरोपी अभी फरार हैं।
साइबर अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसे लेकर अदालतें सख्त रुख अपना रही हैं। यह मामला डिजिटल ठगी के बढ़ते खतरे को एक बार फिर रेखांकित करता है।

