Mystery deepens surrounding Sadhvi Prem Baisa’s death: पश्चिमी राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। बुखार की शिकायत पर आश्रम में कंपाउंडर द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के मात्र 5 मिनट बाद वे बेहोश हो गईं और अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दी गईं। मौत के चार घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से कथित सुसाइड नोट पोस्ट होने से सनसनी फैल गई। पुलिस ने कंपाउंडर को हिरासत में ले लिया है और सोशल मीडिया हैंडल्स की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।
बोरानाडा स्थित आश्रम में बुधवार शाम करीब 5:30 बजे साध्वी को प्रेक्षा अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। डॉ. प्रवीण जैन ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने बताया कि बुखार होने पर नर्सिंग स्टाफ को बुलाकर इंजेक्शन लगवाया गया था, जिसके बाद वे निढाल हो गईं। अस्पताल ने एंबुलेंस की पेशकश की, लेकिन परिजनों ने इनकार कर शव निजी वाहन से ले गए। बाद में पुलिस ने शव को एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया।
सुसाइड नोट ने खड़े किए सवाल
सबसे बड़ा रहस्य मौत के चार घंटे बाद रात 9:28 बजे इंस्टाग्राम पर आई पोस्ट है। इसमें साध्वी ने लिखा कि उन्होंने जीवन सनातन धर्म प्रचार के लिए जिया, कई संतों से अग्नि परीक्षा की मांग की, लेकिन न्याय नहीं मिला। ट्रोलिंग और ब्लैकमेलिंग का दर्द जाहिर करते हुए अलविदा कहा। पोस्ट में प्रकृति की मर्जी का जिक्र है। पुलिस इसे प्री-शेड्यूल्ड मान रही है या किसी और ने पोस्ट किया, इसकी जांच हो रही है।
वायरल वीडियो विवाद की पुरानी आग
साध्वी पिछले साल एक वायरल वीडियो के कारण चर्चा में थीं, जिसमें उन्हें एक बाबा (वीरमपुरी महाराज) के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था। इसे फेक बताते हुए साध्वी ने ब्लैकमेलिंग और ट्रोलिंग की शिकायत की थी। कई रिपोर्ट्स में मानसिक तनाव को मौत की वजह माना जा रहा है, लेकिन इंजेक्शन का एंगल नया ट्विस्ट लेकर आया है।
पुलिस जांच तेज, राजनीतिक बवाल
बोरानाडा पुलिस ने आश्रम का कमरा सीज कर दिया। कंपाउंडर से पूछताछ जारी है। आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने हत्या का शक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पोस्टमॉर्टम गुरुवार को होगा, जिससे मौत की असली वजह साफ हो सकती है। अनुयायी और संत समाज सदमे में हैं।
साध्वी प्रेम बाईसा महंत वीरमनाथ की शिष्या थीं और बाड़मेर मूल की थीं। उनके प्रवचनों में हजारों श्रद्धालु जुटते थे। यह मामला सोशल मीडिया ट्रोलिंग के खतरों और न्याय की मांग को फिर उजागर कर रहा है। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है, जल्द सच सामने आने की उम्मीद है।

