Controversy over IPS officer’s suggestion to teach the Gita along with the Quran in madrasas: BJP विधायक का समर्थन, विपक्षी दलों में असंतोष

Controversy over IPS officer’s suggestion to teach the Gita along with the Quran in madrasas: मध्य प्रदेश के वरिष्ठ IPS अधिकारी और ADG (ट्रेनिंग) राजा बाबू सिंह द्वारा गणतंत्र दिवस पर एक मदरसे के छात्रों को कुरान के साथ भगवद गीता पढ़ने की सलाह देने पर सियासी बहस छिड़ गई है। अधिकारी ने सीहोर जिले के डोराहा गांव स्थित मदरसा इस्लामिया मदीनतुल उलूम के छात्रों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया था। इस बयान का BJP ने समर्थन किया है, जबकि विपक्षी दल इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बता रहे हैं।

ADG राजा बाबू सिंह (1994 बैच) ने छात्रों से कहा, “पवित्र कुरान के साथ भगवद गीता का भी अध्ययन करें, क्योंकि यह सदियों से मानवता को ज्ञान की रोशनी प्रदान कर रही है। इससे आपका भविष्य रोशन होगा।” उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सहिष्णुता पर भी जोर दिया तथा भारत की एकता-अखंडता बनाए रखने की अपील की। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मदरसे के मौलाना उनके पुराने मित्र हैं और उनके अनुरोध पर ही संबोधन दिया।

BJP विधायक का समर्थन
BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने बयान का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, “गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, जीवन दर्शन है। इससे आत्मबल, सामाजिक समरसता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा मिलती है। मदरसों में हिंदू बच्चों को उर्दू पढ़ाई जा सकती है, तो गीता पढ़ाने में आपत्ति क्यों? गीता किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, यह सभी के लिए मार्गदर्शक है।”

विपक्ष का रुख और विवाद
विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, ने इसे सरकारी अधिकारी द्वारा धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया। कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या यह संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान या बड़ा विरोध प्रदर्शन सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर बहस तेज है, जहां कुछ इसे सद्भावना की पहल बता रहे हैं तो कुछ धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठा रहे हैं।

अधिकारी का बैकग्राउंड
राजा बाबू सिंह पहले भी गीता को बढ़ावा देने के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में रंगरूटों के लिए गीता और रामचरितमानस के पाठ सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए थे। कश्मीर में BSF IG रहते हुए भी उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक पहलों की चर्चा हुई थी।

यह मामला धार्मिक सद्भाव vs सरकारी हस्तक्षेप की बहस को फिर से उजागर कर रहा है। फिलहाल कोई नई कार्रवाई या जांच के आदेश नहीं हुए हैं, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा जारी है। मामले पर आगे की प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।

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