Manikarnika Ghat controversy: काशी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में मूर्तियां मलबे में दबी दिखने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें AI जनरेटेड बताते हुए भ्रामक प्रचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
पुलिस ने कम से कम 8 लोगों पर FIR दर्ज की है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे कांग्रेस की साजिश करार दिया है। दूसरी ओर, संकट मोचन मंदिर के महंत और IIT-BHU के प्रोफेसर डॉ. विशंभर नाथ मिश्रा ने सरकार से साइट को पत्रकारों के लिए खोलने की मांग की है और इसे काशी की आस्था व विरासत पर हमला बताया है।
डॉ. विशंभर नाथ मिश्रा की भावुक अपील
एक हालिया इंटरव्यू में डॉ. मिश्रा ने घाट पर हुई तोड़फोड़ पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “वो तस्वीरें AI हैं तो असली साइट सबको दिखाइए, सारे जर्नलिस्ट को जाने दीजिए ताकि लोग तुलना कर सकें। अब आपने वहां कैमरा ले जाना बंद कर दिया है। सुना जा रहा है कि मलबे को बालू से ढक दिया गया है। अगर वहां कुछ गलत नहीं हुआ, तो छिपाने की क्या जरूरत है?”
महंत ने आगे कहा, “यहाँ कंकड़-कंकड़ में शिव हैं। आप एक पत्थर तोड़ते हैं, एक चौतरा तोड़ते हैं—यहाँ मढ़ियों का भी एक कॉन्सेप्ट है। पता नहीं किसने किस श्रद्धा से उसे वहां रखा था, और आप उसे केवल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नष्ट कर रहे हैं? मणिकर्णिका एक तीर्थ है जहाँ भगवान विष्णु ने तपस्या की थी। मार्क ट्वेन ने कहा था कि काशी इतिहास से भी पुरानी है। यह हेरिटेज सिटी है, यहाँ रेस्टोरेशन होना चाहिए, न कि मिटाकर नया ढांचा खड़ा करना।”
डॉ. मिश्रा ने श्मशान घाट पर सुविधाओं की बात को खारिज करते हुए कहा, “श्मशान घाट पर आप क्या सुविधा देंगे? वहां लोग शोक में आते हैं। वहां चप्पल पहनकर भी नहीं जाना चाहिए। बनारस का सबसे बड़ा मुद्दा सड़क जाम और गंदगी है, उसे ठीक करिए। ओरिजिनल स्मारकों को बचाइए। लोग यहाँ ‘वाइब्स’ के लिए आते हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नहीं।”
गैर-राजनीतिक व्यक्ति होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे विरोध से क्या फायदा? मैं इस शहर के लिए जीता हूँ। मोदी जी और योगी जी से मेरी व्यक्तिगत मुलाकात है, मैं उन्हें सही फीडबैक देना चाहता हूँ। आप राजा हैं, जो करना है करिए, पर कल अगर कोई टोकेगा तो कम से कम आपके पास यह तो रहेगा कि किसी ने आपको आगाह किया था।” FIR के डर पर उन्होंने कहा, “हम कोई अमर होकर तो आए नहीं हैं। ईश्वर हमें लाए हैं, वही ले जाएंगे। लेकिन मरते समय मुझे झूठ नहीं बोलना। मैं भगवान से डरता हूँ, इंसानों से नहीं।”
AI जनरेटेड तस्वीरें, कोई मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 जनवरी को वाराणसी पहुंचकर स्पष्ट किया कि घाट पर कोई मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है और सभी प्रतिमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने वायरल तस्वीरों को AI से बनाया गया बताया और कहा, “यह काशी को बदनाम करने की साजिश है। कांग्रेस ने कभी अहिल्याबाई का सम्मान नहीं किया, अब झूठी तस्वीरें फैलाकर भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है।” सीएम ने चेतावनी दी कि ऐसे प्रचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
वाराणसी पुलिस ने चौक थाने में भ्रामक तस्वीरें फैलाने के आरोप में 8 FIR दर्ज की हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये पोस्ट धार्मिक भावनाएं आहत करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के इरादे से की गई थीं। घाट पर 35 करोड़ रुपये की लागत से कायाकल्प कार्य चल रहा है, जिसमें पुरानी मढ़ी (चबूतरा) हटाई गई, लेकिन मूर्तियां सुरक्षित निकालकर पुनर्स्थापित की जा रही हैं।
विपक्ष का हमला और सियासी घमासान
कांग्रेस, सपा और आप ने इसे आस्था पर हमला बताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “AI बहाना है, बुलडोजर सच्चाई है। अगर तस्वीरें फेक हैं तो साइट पत्रकारों को दिखाइए।”
अखिलेश यादव ने टिप्पणी की कि “काशी ही बीजेपी के विनाश का कारण बनेगी।” आप कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने बल प्रयोग किया।
विवाद 10 जनवरी से शुरू हुआ जब एक मढ़ी तोड़े जाने के दौरान पुरानी मूर्तियां गिरने की तस्वीरें वायरल हुईं। होल्कर ट्रस्ट ने भी शिकायत की, लेकिन बाद में आश्वासन मिला कि प्रतिमाएं सुरक्षित हैं।
काशी की आत्मा कहे जाने वाले मणिकर्णिका घाट पर विकास vs विरासत का यह विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। दोनों पक्षों के दावों के बीच स्थानीय लोग और श्रद्धालु सच्चाई जानने को बेताब हैं। मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या सरकार साइट को खोलेगी या विवाद और बढ़ेगा।

