SIT रिपोर्ट का धमाका: ‘टाली जा सकती थी युवराज की मौत’, एक दर्जन अफ़सरों पर गिरेगी गाज!

नोएडा के सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में अब न्याय की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन में भारी हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि इसमें लगभग एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ है।

नोएडा: नोएडा के सेक्टर 150 में 16 जनवरी की रात को हुए हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। अब इस मामले में एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर के नेतृत्व वाली SIT ने करीब 700 पन्नों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के निष्कर्ष न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करते हैं।

1. रेस्क्यू में 2 घंटे की ‘कातिलाना’ देरी

SIT की रिपोर्ट में सबसे गंभीर सवाल रेस्क्यू ऑपरेशन के समय पर उठाया गया है। जांच के अनुसार, हादसे के बाद युवराज करीब 90 से 120 मिनट (2 घंटे) तक जीवित था। वह अपनी कार की छत पर खड़ा होकर मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगाता रहा। मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीमें पहुँच चुकी थीं, लेकिन समन्वय की कमी और ‘तैरना नहीं आता’ जैसे बहानों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो युवराज आज जीवित होता।

2. रडार पर आए कई बड़े नाम

सूत्रों के अनुसार, SIT ने अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल, जल-कल विभाग और स्थानीय पुलिस के अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं।

  • नोएडा प्राधिकरण: बिना बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड के सड़क के किनारे गहरा गड्ढा छोड़ने के लिए सिविल और ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार माना गया है।
  • पुलिस व SDRF: घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद त्वरित निर्णय न ले पाने के कारण संबंधित पुलिसकर्मियों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों पर उंगली उठी है।
  • बिल्डर की मनमानी: लोटस ग्रीन्स और विशटाउन प्लानर्स जैसे बिल्डरों की लापरवाही भी उजागर हुई है, जिन्होंने व्यावसायिक प्रोजेक्ट के लिए खोदे गए 20 फीट गहरे गड्ढे को खुला छोड़ दिया था।

3. ‘गेंद एक-दूसरे के पाले में’ डालने की कोशिश

जांच के दौरान नोएडा प्राधिकरण और पुलिस ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने की कोशिश की। प्राधिकरण ने तर्क दिया कि उसने पहले भी सुरक्षा मानकों के लिए नोटिस दिए थे, जबकि पुलिस का कहना था कि उन्हें तकनीकी संसाधनों (जैसे क्रेन और गोताखोर) की कमी का सामना करना पड़ा। हालांकि, SIT ने इन तर्कों को खारिज करते हुए इसे सामूहिक विफलता करार दिया है।

4. अब तक की बड़ी कार्रवाई

  • नोएडा प्राधिकरण के CEO लोकेश एम. को पहले ही पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है।
  • ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को निलंबित किया जा चुका है।
  • बिल्डर कंपनी के मालिक अभय कुमार समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अगले कुछ घंटों में होगी कार्रवाई

SIT की रिपोर्ट अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के पास है। माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों में रिपोर्ट में नामित अधिकारियों पर निलंबन और विभागीय जांच जैसी कड़ी कार्रवाई शुरू हो सकती है। पीड़ित परिवार लगातार ‘हत्या’ का मुकदमा दर्ज करने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग कर रहा है।

 

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