ताजा जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य की तबीयत बिगड़ने के बावजूद धरना जारी रहा। मंगलवार को महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित कई संतों ने समर्थन में धूनी रमाई। हालांकि, कुछ संतों ने उन्हें ‘ढोंगी’ करार दिया और विवाद को अनावश्यक बताया। मेला प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और कोई नया विवाद न हो, इस पर नजर रखी जा रही है।
राजनीतिक बयानों ने बढ़ाई गरमाहट
विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस ने BJP पर ‘संतों का अपमान’ का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य को नोटिस को ‘निंदनीय’ बताया। शिवसेना (UBT) ने मुंबई में प्रदर्शन किया और इसे ‘सनातन का अपमान’ कहा। भाजपा नेता उमा भारती ने प्रशासन पर ‘मर्यादा तोड़ने’ का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से धरना समाप्त करने की अपील की। कुछ मामलों में अधिकारियों के इस्तीफे हुए, जैसे बैरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री और अयोध्या GST डिप्टी कमिश्नर, जिन्हें बाद में सस्पेंड कर दिया गया। योगी सरकार ने कार्रवाई को कानूनी बताया और किसी गलती से इनकार किया।
आम जनता की मिली-जुली राय
सोशल मीडिया और जनता में प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कई लोग इसे ‘सनातन धर्म और संतों का अपमान’ बता रहे हैं और शंकराचार्य के समर्थन में हैं। कुछ ने लिखा कि सदियों पुरानी परंपरा का सम्मान होना चाहिए। वहीं, एक पक्ष इसे अनावश्यक विवाद और राजनीतिक ड्रामा बता रहा है, कह रहा कि कानून सबके लिए बराबर है। X (ट्विटर) पर कुछ यूजर्स ने योगी सरकार का बचाव किया, तो कुछ ने इसे ‘हिंदुत्व की राजनीति’ का नमूना बताया। कुल मिलाकर, धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात प्रमुख है, लेकिन कई लोग शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
शंकराचार्य के प्रस्थान से विवाद अब शांत होने की उम्मीद है, लेकिन इस घटना ने कुंभ-मेला व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं पर बहस छेड़ दी है। मेला प्रशासन का कहना है कि सभी नियमों का पालन हुआ और सुरक्षा सर्वोपरि थी।

