Bangladesh textile crisis deepens: 1 फरवरी से सभी मिलें अनिश्चितकालीन बंद करने की घोषणा, भारतीय यार्न इम्पोर्ट पर विवाद चरम पर

Bangladesh textile crisis deepens: बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में संकट लगातार गहराता जा रहा है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने 1 फरवरी 2026 से देशभर की सभी स्पिनिंग मिलों (यार्न उत्पादन इकाइयों) को अनिश्चितकालीन बंद करने की घोषणा कर दी है। कारण है ड्यूटी-फ्री यार्न इम्पोर्ट (खासकर भारत से) की सुविधा को तुरंत वापस न लेना। मिल मालिकों का कहना है कि सस्ता भारतीय यार्न बाजार में बाढ़ की तरह आ रहा है, जिससे स्थानीय मिलें भारी नुकसान झेल रही हैं और बंद हो रही हैं।

BTMA के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय ने नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (NBR) को बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत 10-30 काउंट कॉटन यार्न के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट पर रोक लगाने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने अब तक इसे लागू नहीं किया। यदि जनवरी अंत तक फैसला नहीं हुआ तो 1 फरवरी से सभी मिलें बंद हो जाएंगी। इससे करीब 10 लाख मजदूरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।

मुख्य कारण और मांगें
• पिछले 3-4 महीनों में गैस संकट, अनियमित सप्लाई और ऊंची कीमतों से उद्योग को करीब 2 अरब डॉलर का नुकसान।
• 50 से ज्यादा मिलें पहले ही बंद, अनसोल्ड यार्न स्टॉक 12,500 करोड़ टका से अधिक।
• बैंक लोन चुकाने में असमर्थता, एनपीए बढ़ने का खतरा।
• BTMA की मांगें: ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट तुरंत रोकना, सब्सिडाइज्ड और निरंतर गैस सप्लाई, VAT में छूट, बैंक लोन पर कम ब्याज और सरकार से व्यापक बातचीत।
2025 में बांग्लादेश ने करीब 70 करोड़ किलोग्राम यार्न इम्पोर्ट किया, जिसमें 78% भारत से आया। स्थानीय मिलर्स का दावा है कि घरेलू उत्पादन राष्ट्रीय मांग का 50-70% पूरा कर सकता है।

गारमेंट एक्सपोर्टर्स का विरोध
दूसरी तरफ बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) और BKMEA ने इसका कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि स्थानीय यार्न महंगा और कम गुणवत्ता वाला है, जबकि भारतीय यार्न सस्ता और बेहतर है। ड्यूटी लगने से यार्न की कीमत 0.30-0.60 डॉलर प्रति किलो बढ़ जाएगी, जिससे गारमेंट उत्पादन महंगा हो जाएगा और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ेगी। RMG सेक्टर देश की कुल निर्यात आय का 85% योगदान देता है।
भारतीय यार्न एक्सपोर्टर अमित सोती ने कहा कि बॉन्डेड सुविधा खत्म होने से बांग्लादेश के गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स की लागत बढ़ेगी और अंततः उनका निर्यात उद्योग प्रभावित होगा।

सरकार की स्थिति
अंतरिम सरकार पर दोनों पक्षों से दबाव है। वाणिज्य मंत्रालय ने मिलर्स के पक्ष में सिफारिश की, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। मीटिंग्स में गतिरोध बरकरार है। 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है।

यह विवाद बांग्लादेश के 23 अरब डॉलर के टेक्सटाइल सेक्टर और लाखों नौकरियों को खतरे में डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना संतुलित नीति के उद्योग में लंबी अस्थिरता आ सकती है। स्थिति पर सरकार की नजर है, लेकिन अब तक कोई राहत भरा ऐलान नहीं हुआ।
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