New Delhi news दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंबोडिया और नेपाल से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस ऑपरेशन में गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा से कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन, चेक बुक्स और अन्य अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
डीसीपी (आईएफएसओ) विनीत कुमार ने बताया कि मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई, जब 77 वर्षीय पीड़िता को फोन कर बताया गया कि उसके नाम पर जारी सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर नकली सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर आरोपियों ने पीड़िता और उसके पति को लगातार निगरानी में रखकर डराया गया और किसी से संपर्क न करने की धमकी दी।
एक कॉल से बदल गई जिंदगी
आरोपियों ने जांच के नाम पर पीड़ित को उसकी एफडी और शेयर निवेश की रकम तथाकथित ‘आरबीआई द्वारा अनिवार्य खाते’ में ट्रांसफर करने को मजबूर किया। आठ लेन-देन के जरिए कुल 14.84 करोड़ रुपए की रकम म्यूल (खच्चर) बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई। मामले में 10 जनवरी 2026 को स्पेशल सेल के आईएफएसओ थाने में ई-एफआईआर संख्या 10/2026 दर्ज की गई।
तीन राज्यों से दबोचे गए धोखेबाज
तकनीकी निगरानी और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर आईएफएसओ टीम ने वडोदरा, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ और भुवनेश्वर में एक साथ छापे मारे। जांच में सामने आया कि गुजरात के वडोदरा निवासी पटेल दिव्यांग के खाते में पीड़िता से सीधे 4 करोड़ रुपये पहुंचे थे। उसे गिरफ्तार करने के बाद वडोदरा से ही शितोले कृतिक को भी पकड़ा गया। इसके बाद पुलिस ने ओडिशा के भुवनेश्वर से महावीर शर्मा उर्फ नील और गुजरात के वडोदरा से अंकित मिश्रा उर्फ रॉबिन को गिरफ्तार किया। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से अरुण कुमार तिवारी और उसके बाद प्रद्युमन तिवारी उर्फ एसपी तिवारी को दबोचा गया। कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए लखनऊ से भूपेंद्र मिश्रा और आदेश यादव को भी गिरफ्तार किया गया।
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