कश्मीर घाटी में पहली बार पहुंची चावल के 42 रेक की गाड़ी
New Delhi news कश्मीर घाटी की खाद्य सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जम्मू मंडल ने पंजाब के संगरूर रेल टर्मिनल से अनंतनाग गुड्स शेड तक खाद्यान्न (चावल) की पहली पूर्ण रेलवे रैक का सफल संचालन किया। यह पहली बार है जब घाटी में 42 वैगनों वाली पूर्ण रैक के माध्यम से खाद्यान्न की आपूर्ति की गई है।
अब तक कश्मीर घाटी में खाद्यान्न की आपूर्ति केवल मिनी रैक के जरिए होती थी, जिनमें 21 वैगन शामिल होते थे और जिनकी क्षमता लगभग 1,384 मीट्रिक टन थी। नई व्यवस्था के तहत 42 वैगनों वाली पूर्ण रैक में कुल 2,768 मीट्रिक टन चावल लाया गया, जिससे एक ही खेप में दोगुनी मात्रा की आपूर्ति संभव हो सकी।
एफसीआई के सहयोग से मिली मंजूरी
उत्तर रेलवे के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इस पूर्ण रैक संचालन को स्वीकृति दी गई। यह पहल केंद्र सरकार की खाद्य सुरक्षा नीति को मजबूती देने के साथ-साथ घाटी में आपूर्ति शृंखला को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
तेज, सुरक्षित और कुशल परिवहन
यह रैक 21 जनवरी को संगरूर से लोड की गई थी और 24 घंटे से भी कम समय में अनंतनाग पहुंच गई। खराब मौसम के कारण अनलोडिंग में मामूली देरी जरूर हुई, लेकिन सभी हैंडलिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण-क्षमता रैक के उपयोग से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, खाद्यान्न आपूर्ति अधिक स्थिर होगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी ट्रकों की निर्भरता घटेगी। इससे पर्यावरणीय प्रदूषण कम होने के साथ-साथ घाटी में खाद्यान्न की निर्बाध उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

