Gen Z in the corporate world: बनी ‘छोटी बहू’, मिलेनियल्स हैं ‘बड़ी बहू’, मानसिक स्वास्थ्य और बाउंड्री सेट करने पर जोर, वायरल हो रही तुलना

Gen Z in the corporate world: कार्यालय संस्कृति में पीढ़ीगत बदलाव को समझाने के लिए एक नया और दिलचस्प एनालॉजी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मीडिया की हालिया रिपोर्ट में जेन जेड (1997-2012 के बीच जन्मे) को कार्पोरेट दुनिया की ‘छोटी बहू’ करार दिया गया है, जो अपनी शर्तों पर जीती है, बाउंड्री सेट करती है और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। वहीं, मिलेनियल्स (1981-1996 के बीच जन्मे) को ‘बड़ी बहू’ बताया गया है, जो चुपचाप त्याग और समर्पण करती रही, लेकिन कभी सराहना नहीं मिली।

रिपोर्ट में लेखिका ने भारतीय पारंपरिक परिवार की तुलना कार्यस्थल से की है। बड़ी बहू सुबह जल्दी उठती है, सबकी खुशी के लिए खुद को एडजस्ट करती है और रात को सोचती रहती है कि क्या बेहतर कर सकती थी। ठीक वैसे ही मिलेनियल्स ने लंबे घंटे काम किया, वीकेंड पर कॉल्स अटेंड किए, छुट्टियां स्किप कीं और इसे ‘कमिटमेंट’ का नाम दिया। लेकिन जेन जेड यानी छोटी बहू देर से उठती है, अपनी मर्जी से दिन प्लान करती है और बिना अपराधबोध के खुद को प्राथमिकता देती है।

वायरल लीव एप्लीकेशन और बदलती संस्कृति
रिपोर्ट में कुछ वायरल उदाहरण दिए गए हैं, जैसे अक्टूबर 2025 में गुरुग्राम की एक स्टार्टअप में जेन जेड कर्मचारी ने ब्रेकअप के बाद 10 दिन की छुट्टी मांगी। कर्मचारी ने ईमेल में लिखा, “मैं हाल ही में ब्रेकअप से गुजरा हूं और फोकस नहीं कर पा रहा। मुझे छोटा ब्रेक चाहिए।” सीईओ ने न केवल छुट्टी मंजूर की, बल्कि इसे “सबसे ईमानदार एप्लीकेशन” कहकर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो वायरल हो गया। एक अन्य मामले में कर्मचारी ने गर्लफ्रेंड के जाने से पहले समय बिताने के लिए छुट्टी मांगी और मैनेजर ने सराहना की।

लेखिका के अनुसार, मिलेनियल्स ऐसे कारणों से छुट्टी मांगने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। वे बीमार होने पर भी काम करते थे, पब्लिक में डांट सहते थे और इसे ‘प्रोफेशनलिज्म’ मानते थे। जेन जेड इसे बदल रहा है – वे बर्नआउट को ग्लोरिफाई नहीं करते, मानसिक स्वास्थ्य लीव मांगते हैं और काम से पहले वीकली ऑफ व लीव्स की डिटेल जानना चाहते हैं।

2026 में जेन जेड की प्राथमिकताएं
हालिया सर्वे और रिपोर्ट्स से पता चलता है कि 2026 में भारतीय कार्यस्थलों पर जेन जेड का फोकस काम-लाइफ बैलेंस, मेंटल हेल्थ और ऑथेंटिसिटी पर है। एक सर्वे के अनुसार, 82% जेन जेड नौकरी चुनते समय मेंटल हेल्थ को टॉप प्राथमिकता देते हैं। वे जॉब हॉपिंग (ऑफिस फ्रॉगिंग) भी ज्यादा करते हैं अगर मेंटल हेल्थ प्रभावित हो। कार्यस्थलों पर जेन जेड की बाउंड्री सेट करने की आदत को सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है, जो पुरानी पीढ़ियों के लिए भी सबक है।
यह तुलना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन रही है। कई लोग इसे जेन जेड की ‘इवोल्यूशन’ मानते हैं, जो मिलेनियल्स के त्याग पर खड़ी हुई है। वहीं, कुछ इसे ‘एंटाइटलमेंट’ कहकर आलोचना भी कर रहे हैं। कुल मिलाकर, यह भारतीय कार्पोरेट कल्चर में आ रहे बड़े बदलाव को रेखांकित करता है।

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