Punjab Prohibition of Cow Slaughter Act: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 50 किलो गोमांस रखने के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज की

Punjab Prohibition of Cow Slaughter Act: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 62 वर्षीय व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जो अवैध रूप से 50 किलोग्राम गोमांस रखने और बेचने के आरोप में फंसा है। जस्टिस अराधना साहनी की बेंच ने आरोपी के इस दावे को “चालाक चाल और बाद में गढ़ी गई कहानी” करार दिया कि मांस सप्लायरों ने उसे धोखे में रखकर भैंस का मांस बताकर गोमांस थमा दिया।

कोर्ट ने 19 जनवरी को दिए फैसले में कहा कि आरोपी ने असाधारण कठिनाई का कोई मामला नहीं बनाया है, जिसके आधार पर उसे अग्रिम जमानत दी जा सके। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत असाधारण राहत है और इसे रूटीन में नहीं दिया जा सकता।

मामला पंजाब प्रोहिबिशन ऑफ काऊ स्लॉटर एक्ट, 1955 की धारा 8 और भारत न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा) से जुड़ा है। एक गौ रक्षक समूह के सदस्य की गुप्त सूचना पर पुलिस ने आरोपी को स्कूटर पर मांस ले जाते पकड़ा था। वाहन से 50 किलो मांस बरामद हुआ। शुरुआत में आरोपी ने दो बिल दिखाकर दावा किया कि उसने पंजाब और उत्तर प्रदेश के विक्रेताओं से भैंस का मांस खरीदा है।

हालांकि, हैदराबाद के नेशनल मीट रिसर्च इंस्टीट्यूट की फोरेंसिक रिपोर्ट में सैंपल को “बोस इंडिकस (बैल/बैल)” का मांस पाया गया। इसके बाद पुलिस ने काऊ स्लॉटर एक्ट की धारा 8 जोड़ी। आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ और गिरफ्तारी की आशंका से हाईकोर्ट पहुंच गया।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि पूरा नेटवर्क उजागर हो सके — गायों का वध कहां हुआ, मांस कैसे बेचा जाता है, खरीदार कौन हैं आदि। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का दावा विश्वसनीय नहीं है क्योंकि दोनों राज्यों के विक्रेता उसे एकसाथ धोखा नहीं दे सकते। शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि गाय हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में पवित्र है और ऐसे कृत्य से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

यह फैसला आज सामने आया है और क्षेत्र में गौ रक्षा कानूनों के सख्त क्रियान्वयन को रेखांकित करता है। पुलिस जांच जारी रखे हुए है और आरोपी की गिरफ्तारी अब संभावित है। पंजाब-हरियाणा क्षेत्र में अवैध गोमांस व्यापार पर नजर रखने वाले समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

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