Trump’s controversial statement: नाटो सैनिकों ने अफगानिस्तान में ‘फ्रंट लाइन से दूर’ रहकर लड़ाई लड़ी, यूरोपीय सहयोगियों में भारी आक्रोश

Trump’s controversial statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में दावा किया है कि नाटो सहयोगी देशों के सैनिकों ने अफगानिस्तान युद्ध में फ्रंट लाइन से दूर रहकर हिस्सा लिया। इस बयान से यूरोपीय देशों में तीव्र नाराजगी फैल गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इसे “अपमानजनक और घोर निराशाजनक” बताया, जबकि पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों ने ट्रंप से माफी की मांग की है।

ट्रंप ने 23 जनवरी को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “हमने कभी उनकी (नाटो की) जरूरत नहीं महसूस की। वे कहते हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान में कुछ सैनिक भेजे थे… हां, भेजे थे, लेकिन वे फ्रंट लाइन से थोड़ा पीछे, थोड़ा दूर रहकर लड़े।” राष्ट्रपति ने नाटो पर पुराना आरोप दोहराते हुए कहा कि अमेरिका ने यूरोप की बहुत मदद की, लेकिन सहयोगी देशों ने कम योगदान दिया।

तथ्य क्या कहते हैं?
9/11 हमलों के बाद नाटो ने पहली और एकमात्र बार आर्टिकल 5 लागू किया, जिसमें एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। इसके बाद 38 नाटो देशों ने अफगानिस्तान में सैनिक भेजे। 2001 से 2021 तक चले युद्ध में गठबंधन बलों की कुल मौतें करीब 3,500 रहीं, जिनमें अमेरिका के अलावा अन्य नाटो देशों के 1,100 से अधिक सैनिक शहीद हुए।
• अमेरिका: 2,456 मौतें
• ब्रिटेन: 457 मौतें
• कनाडा: 159
• फ्रांस: 90
• जर्मनी: 62
• इटली: 53
• डेनमार्क: 44 (जनसंख्या के अनुपात में अमेरिका के बराबर)

विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटिश, कनाडाई, डेनिश और एस्टोनियाई सैनिकों ने हेलमंद और कंधार जैसे सबसे खतरनाक इलाकों में सबसे कड़ी लड़ाई लड़ी। हेलमंद प्रांत में शुरू में मुख्य रूप से ब्रिटिश और डेनिश सैनिक तैनात थे, अमेरिकी सैनिक बाद में 2008 में आए। एक शोध पत्र के अनुसार, ब्रिटिश और कनाडाई सैनिकों ने अपनी तैनाती के प्रतिशत में अमेरिकी सैनिकों से दोगुना जोखिम उठाया।

यूरोपीय देशों की तीव्र प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा, “ट्रंप का बयान अपमानजनक और घोर निराशाजनक है। अगर मैंने ऐसी बात कही होती तो मैं जरूर माफी मांगता।” उन्होंने 457 ब्रिटिश सैनिकों की बहादुरी को याद किया।

प्रिंस हैरी, जो खुद दो बार अफगानिस्तान में तैनात रहे, ने बयान जारी कर कहा कि नाटो सैनिकों की कुर्बानियां सम्मान की हकदार हैं। पूर्व सैनिकों ने इसे “अंतिम अपमान” बताया। एक शहीद की मां ने कहा, “मेरा बेटा सिर्फ 18 साल का था जब वह साथी सैनिकों को बचाते हुए शहीद हुआ।”

पोलैंड के पूर्व जनरल रोमन पोल्को ने कहा, “ट्रंप ने लाल रेखा पार की। हमने इस गठबंधन के लिए खून बहाया।” नाटो के पूर्व कमांडर जेम्स स्टावरिडिस ने भी ट्रंप के दावे को खारिज किया।
यह विवाद ग्रीनलैंड मुद्दे पर तनाव के बीच आया है, जहां ट्रंप ने हाल में अमेरिकी नियंत्रण की मांग की थी, लेकिन बाद में सैन्य बल और टैरिफ की धमकी वापस ले ली। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान नाटो गठबंधन पर उनके पुराने असंतोष को एक बार फिर से उजागर कर दिया है।

ट्रंप के इस बयान से नाटो सहयोगियों में असंतोष बढ़ गया है, जबकि तथ्य स्पष्ट रूप से सहयोगी देशों की बहादुरी और कुर्बानी की गवाही देते हैं।

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