सड़क से रेल पर माल ढुलाई शिफ्ट होने से ईंधन बचत, प्रदूषण में कमी और लॉजिस्टिक्स को बड़ी राहत

New Delhi news  भारतीय रेल की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर संचालित ‘ट्रक्स-ऑन-ट्रेन’ (टीओटी) सेवा ने आर्थिक, पर्यावरणीय और लॉजिस्टिक्स मोर्चे पर उल्लेखनीय लाभ दिया है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस सेवा से अब तक 131 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया है, जबकि सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने से ईंधन की बचत और प्रदूषण में भी बड़ी कमी आई है।

सेवा की शुरुआत से अब तक 1,955 से अधिक ट्रिप पूरी की जा चुकी हैं, जिनमें 10 लाख टन से अधिक माल का परिवहन किया गया। केवल वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल–दिसंबर) में ही 545 रेक के माध्यम से 3 लाख टन से अधिक माल पहुंचाया गया, जिससे 36.95 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

न्यू पालनपुर-न्यू रेवाड़ी खंड में विशेष सफलता

पश्चिमी डीएफसी के 636 किलोमीटर लंबे न्यू पालनपुर–न्यू रेवाड़ी खंड पर ट्रकों की लंबी दूरी की यात्रा रेल पर स्थानांतरित होने से लगभग 48,875 ट्रक सड़क से हट गए। इसका परिणामस्वरूप 88.81 लाख लीटर डीजल की बचत और 2.30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी हुई।

लॉजिस्टिक्स और सामाजिक लाभ

रेल मंत्रालय ने बताया कि सेवा से परिवहनकर्ताओं को हाई-वे टोल बचाव, कम ईंधन खर्च और समय पर माल पहुंचना जैसी सुविधाएं मिली हैं। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं में कमी, चालक थकान में गिरावट और राजमार्गों पर यातायात दबाव कम होना भी देखा गया।

डेयरी क्षेत्र और भविष्य की संभावनाएँ

डेयरी क्षेत्र को विशेष लाभ मिला, क्योंकि दूध टैंकरों पर जीएसटी नहीं लगाया गया और अमूल जैसे बड़े ग्राहक सेवा में जुड़े। मंत्रालय का कहना है कि टीओटी सेवा से न केवल रेलवे को नया राजस्व स्रोत मिला, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत घटाने, ईंधन आयात कम करने और स्वच्छ परिवहन को भी बढ़ावा मिला। आने वाले समय में इसके विस्तार से लाभ और बढ़ने की उम्मीद है।

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