घटना 17-18 जनवरी की रात की है। घने कोहरे के कारण युवराज मेहता की SUV सड़क से फिसलकर निर्माण स्थल पर बने करीब 70 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे (सीवर ट्रेंच) में जा गिरी। युवराज ने अपने पिता को फोन करके मदद मांगी और करीब 90 मिनट तक गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारीयों की लापरवाही और देरी के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डूबने और कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया है।
पुलिस जांच में पता चला कि निर्माण कंपनी ने गड्ढे के आसपास कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी साइन नहीं लगाए थे। साथ ही, पानी का जमाव और उसका प्रबंधन न करने से पर्यावरणीय लापरवाही सामने आई है। इससे पहले लापरवाही के आरोप में एक बिल्डर को गिरफ्तार किया जा चुका है और उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
ट्रैफिक तथा अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। यह मामला शहर की बुनियादी सुविधाओं और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की गंभीर कमी को उजागर कर रहा है। कई लोग इसे सिस्टम की उदासीनता का नतीजा बता रहे हैं। जांच जारी है और आगे अपडेट आने की उम्मीद है।

