भूगर्भ विभाग के अधिकारी आशीष कुमार ने हाल ही में क्षेत्र का दौरा कर स्तर की जांच की। उन्होंने इसे चिंताजनक बताया और कहा कि इतनी कम अवधि में 16 फीट की गिरावट गंभीर संकेत है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में कस्बे को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य कारण: अत्यधिक दोहन और निर्माण कार्य
स्थानीय लोगों और पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ का आरोप है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में आरओ प्लांट लगने से भूजल का भारी दोहन हो रहा है। इसके अलावा आसपास चल रहे बड़े निर्माण कार्यों में बहुमंजिला इमारतों के बेसमेंट से लगातार पानी निकाला जा रहा है, जिससे जल भंडार तेजी से खाली हो रहा है। कई शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
इस गिरावट का असर अब दैनिक जीवन पर साफ दिख रहा है। कई इलाकों में हैंडपंप, सबमर्सिबल पंप और नलकूपों से पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा। नालों और अन्य जल स्रोतों में भी पानी की मात्रा काफी कम हो गई है। निवासियों ने प्रशासन से भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण, आरओ प्लांटों की निगरानी और निर्माण कार्यों पर रोक की मांग की है।
पूरे क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति
दनकौर के अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अन्य हिस्सों में भी भूजल स्तर गिर रहा है। नोएडा में पिछले एक साल में करीब 9 फीट (3 मीटर) की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पिछले नौ वर्षों में कुल 20 फीट से अधिक गिरावट हुई है। ग्रेटर नोएडा के कुछ ब्लॉकों में मानसून के बाद भी सुधार सीमित रहा। कारणों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की खराबी और निर्माण में भूजल का अवैध उपयोग प्रमुख हैं।
हाल के दिनों में ग्रेटर नोएडा के कुछ सेक्टरों में दूषित पानी की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे दर्जनों लोग बीमार पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल संरक्षण और रिचार्ज के ठोस उपाय न अपनाए गए तो स्थिति और विकराल हो सकती है।
प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि क्षेत्र को गंभीर संकट से बचाया जा सके।

