घटना बजट सत्र की शुरुआत में हुई, जब गवर्नर को सदन में सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं का अभिभाषण पढ़ना था। सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण में करीब 11 पैराग्राफों पर गवर्नर को आपत्ति थी, जिनमें केंद्र की नीतियों की आलोचना और मनरेगा को कमजोर करने या खत्म करने संबंधी संदर्भ थे। गवर्नर ने इन हिस्सों को हटाने की मांग की थी, लेकिन सहमति नहीं बनी।
जैसे ही गवर्नर ने अपना अलग से तैयार भाषण पढ़ना शुरू किया और विवादित हिस्से छोड़ दिए, कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। नारे लगाते हुए विधायकों ने गवर्नर को घेरने की कोशिश की, लेकिन मार्शलों ने बीच-बचाव कर गवर्नर को सुरक्षित बाहर निकाला। सदन में काफी देर तक अव्यवस्था रही।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने गवर्नर के इस कदम को संविधान का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा, “गवर्नर का कर्तव्य है कि वर्ष की पहली विधानसभा सत्र में अभिभाषण पढ़ें। कैबिनेट ने अभिभाषण की सामग्री को मंजूरी दी थी। गवर्नर ने कैबिनेट-अनुमोदित भाषण नहीं पढ़ा और अपना भाषण पढ़ा। यह संविधान का उल्लंघन है। गवर्नर केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं, जो असंवैधानिक है। हम सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं।”
सूत्रो से मिली ताजा जानकारी के अनुसार
राजभवन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बुधवार को कानून मंत्री एचके पाटिल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गवर्नर से मुलाकात की थी और कुछ विवादित वाक्यों को हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन बाकी पैराग्राफों पर गतिरोध बना रहा।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब कई गैर-बीजेपी शासित राज्यों में गवर्नर और सरकारों के बीच टकराव बढ़ रहा है। मंगलवार को तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने भी सदन से वॉकआउट किया था, जबकि केरल में गवर्नर ने अभिभाषण के कुछ हिस्से नहीं पढ़े। विपक्षी दल इसे केंद्र की ‘राज्य सरकारों को कमजोर करने की रणनीति’ बता रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है, जबकि भाजपा ने कहा कि गवर्नर ने सिर्फ संवैधानिक मर्यादा बनाए रखी। मामला गरमाया हुआ है और आगे कानूनी लड़ाई की संभावना है। जांच और अपडेट जारी हैं।

