गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमित गुप्ता (दिल्ली के मॉडल टाउन का निवासी), अनुराग उर्फ अमित (अलीगढ़ का निवासी) और नवीन भावरी (पंजाब के पठानकोट का निवासी) के रूप में हुई है। अमित गुप्ता के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। तीनों आरोपी 12वीं तक पढ़े-लिखे हैं। पुलिस ने उन्हें फूलमंडी क्षेत्र के पास से पकड़ा।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज तैयार करवाता था। इन फर्जी पहचानों के आधार पर बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से महंगी गाड़ियों का लोन स्वीकृत कराते थे। लोन की किस्तें चुकाए बिना ही ये गाड़ियां पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान जैसे राज्यों में कम कीमत पर बेच देते थे।
खरीदारों को आरोपी भरोसा दिलाते थे कि दो-तीन महीने में वाहन की एनओसी (No Objection Certificate) उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन जब बैंक या फाइनेंस कंपनी के एजेंट किस्त न मिलने पर दिए गए पते पर पहुंचते, तो वह फर्जी निकलता। इतना ही नहीं, गिरोह आरसी में दर्ज हाइपोथेकेशन हटवाकर उसी गाड़ी पर दोबारा लोन भी करा लेता था। इस तरह बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को लाखों-करोड़ों का चूना लगाया जा रहा था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद की गईं लग्जरी गाड़ियां: महिंद्रा थार, मारुति ग्रैंड विटारा, किया सेल्टॉस, महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन और टोयोटा अर्बन क्रूजर टेजर। इसके अलावा 28 महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस जब्त किए गए।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था। ताजा अपडेट के अनुसार, पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। जल्द ही और भी खुलासे होने की संभावना है। यह कार्रवाई सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने वालों के लिए बड़ा अलर्ट है – हमेशा वाहन की आरसी, हाइपोथेकेशन और फाइनेंस स्टेटस की पूरी जांच कराएं। मामला अभी जांच के अधीन है।

