India’s entry into the Mediterranean Quad?: क्या भारत-यूएई-इज़रायल धुरी बन रही है सऊदी-पाक-तुर्की ‘इस्लामिक नाटो’ के मुकाबले?

India’s entry into the Mediterranean Quad?: पश्चिम और दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने सितंबर 2025 में स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) साइन किया, जिसमें नाटो की आर्टिकल 5 जैसा क्लॉज है—एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। अब तुर्की इस ग्रुप में शामिल होने की एडवांस्ड बातचीत कर रहा है। मीडिया और एक्सपर्ट्स इसे ‘इस्लामिक नाटो’ या ‘मुस्लिम नाटो’ कह रहे हैं, जिसमें सऊदी की आर्थिक ताकत, पाकिस्तान की न्यूक्लियर क्षमता और तुर्की की मिलिट्री टेक्नोलॉजी एक साथ नजर आएगी।

इसके जवाब में भारत, यूएई और इज़रायल की नजदीकियां बढ़ रही हैं। 19 जनवरी 2026 को यूएई प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की सिर्फ दो घंटे की भारत विजिट में दोनों देशों ने स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप के लिए लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया। साथ ही LNG डील, ट्रेड बढ़ाने और न्यूक्लियर कोऑपरेशन के समझौते हुए। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि यह सऊदी-पाक एक्सिस के खिलाफ काउंटर मूव है। अब्राहम अकॉर्ड्स के बाद यूएई-इज़रायल रिलेशंस पहले से मजबूत हैं, और भारत का I2U2 (भारत-इज़रायल-यूएई-अमेरिका) ग्रुप इसमें स्ट्रेटेजिक ओवरटोन जोड़ रहा है।

ताजा अपडेट:
यह काउंटर अलाइनमेंट अब अरबियन गल्फ से आगे भूमध्यसागर तक फैल रहा है। इज़रायल, ग्रीस और साइप्रस का 3+1 ग्रुप तुर्की की महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ है, और हालिया रिपोर्ट्स में भारत को इसमें आमंत्रित किया गया है। यूएई भी इसमें शामिल हो सकता है। यह ‘मेडिटेरेनियन क्वाड’ IMEC कॉरिडोर, मैरीटाइम सिक्योरिटी और जॉइंट एक्सरसाइज पर फोकस करेगा। एक्सपर्ट्स जैसे एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (रिटायर्ड) चेतावनी दे रहे हैं कि सऊदी-पाक-तुर्की ग्रुप भारत के साथ-साथ इज़रायल, आर्मेनिया और साइप्रस के लिए भी खतरा बन सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा गरम है। कुछ इसे ‘हिंदू-यहूदी vs मुस्लिम’ फ्रेम कर रहे हैं, लेकिन ऑफिशियल्स कहते हैं कि ये डिफेंसिव और स्ट्रेटेजिक हैं, आइडियोलॉजिकल नहीं। अभी कोई फॉर्मल ट्राइलेटरल मिलिट्री पैक्ट नहीं है—सऊदी-पाक डील तो साइन हो गई, लेकिन तुर्की की एंट्री पेंडिंग है। भारत-यूएई डील भी शुरुआती स्टेज पर है।

ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अमेरिका इनवर्ड फोकस और यूरोप की कमजोरी के बीच रीजनल पावर्स खुद हेजिंग कर रहे हैं। भारत के लिए यह एनर्जी सिक्योरिटी, ट्रेड और काउंटर-टेररिज्म में फायदा देगा, जबकि यूएई सऊदी डॉमिनेंस से बचाव चाहता है। आने वाले दिन बताएंगे कि ये फ्लुइड अलाइनमेंट्स कितने ठोस होते हैं। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया की सिक्योरिटी आर्किटेक्चर नई शक्ल ले रही है!

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